BBN में नहीं सुधर रहे उद्योगपति; नाले में बहा दिया प्रदूषित पानी, सरसा नदी और नाले में झाग के ढेर

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बद्दी बाइपास नाले में बहा दिया प्रदूषित पानी, सरसा नदी और नाले में झाग के ढेर

बद्दी – रजनीश ठाकुर

औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में प्रदूषण नियंत्रण मानकों को धत्ता बताने पर उतारू कुछ उद्योग बोर्ड की सख्ती के बावजूद बाज नहीं आ रहे है। हालात यह है कि मंगलवार को बद्दी के संडोली में सब्जी मंडी के पास के नाले में बेलगाम उद्योग ने प्रदूषित पानी बहा दिया, जिससे नाले से लेकर सरसा नदी तक झाग ही झाग हो गया।

बताया जा रहा है कि काठा स्थित लिक्विड डिर्टजेंट निर्माता उद्योग से केमिकल युक्त प्रदूषित पानी को ईटीपी में ट्रीट करने की बजाए नाले में ठिकाने लगाया जा रहा था,जिससे नाले में झाग के ढेर बन गए । राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मामले की सूचना मिलते ही बद्दी बाइपास स्थित नाले पर पहुंचे और पानी के सैंपल भरे।

बोर्ड की टीम ने बद्दी के काठा स्थित इंडोग्रीन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी उद्योग में दबिश दी और निरीक्षण के दौरान पाई गई खामियों के आधार पर कड़ा कदम उठाते हुए आला अधिकारियों को उक्त उद्योग की बिजली काटने की सिफारिश कर दी है।

यह नाला आगे जाकर सरसा नदी में मिलता है, इस प्रदूषित पानी के कारण कई किलोमीटर दूर तक नदी के किनारे काफी देर तक झाग के ढेर लगे रहे। इसका वीडियो भी खूब वायरल हुआ, स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बद्दी के अफसरों को दी, जिसके बाद बोर्ड के अधिकारियों ने हरकत में आते हुए तुरंत घटनास्थल का रुख कर पानी के सैंपल भरे। -एचडीएम

पानी के सैंपलों की जांच

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बद्दी स्थित मुख्य पर्यावरण अभियंता प्रवीण गुप्ता ने बताया कि पानी के सैंपल ले कर जांच के लिए भेज दिए है। इसी मामले में एक उद्योग की संलिप्तता सामने आई है, जिसकी बिजली काटने की सिफारिश की गई है।

पीसीबी ने कसा शिकंजा

बीबीएन में बेलगाम उद्योग अकसर प्रदूषित पानी नदी-नालों में छोड़ देते है। ऐसे उद्योगों पर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई कर शिकंजा भी कसा है। बीते दिनों भी बोर्ड ने प्रदूषण नियंत्रण मानकों की अवहेलना करने वाले 14 उद्योगों की बिजली काट दी थी, लेकिन इसके बावजूद कई उद्योग लापरवाह बने हुए है।

कहने को बीबीएन के तकरीबन सभी उद्योगों में ईटीपी लगे है, लेकिन कई उद्योगपतियों ने ईटीपी लगाने के बाद ट्रीटमेंट में होने वाले खर्चे के डर से इन्हें चलाना ही गंवारा नहीं समझा।

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