तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा बोले- चीन जाने का मतलब नहीं, भारत मेरा घर

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धर्मशाला – राजीव जस्वाल

तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने धर्मशाला में प्रेस को दिए बयान में कहा कि उनका चीन लौटने का अब कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें भारत पसंद है। उन्होंने कहा कि पंडित नेहरू की पसंद और यह जगह मेरा स्थानी निवास है।

बता दें कि अरुणाचल के तवांग सेक्टर में भारत-चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प को लेकर अभी मामला गरमाया हुआ है। संसद में इसको लेकर विपक्ष हल्लाबोल कर रहा है। इसी दौरान तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा से इस बारे में सवाल पूछा गया।

उन्होंने कहा, ‘चीन लौटने का कोई मतलब नहीं है. मैं भारत को पसंद करता हूं। कांगड़ा पंडित नेहरू की पसंद है।
यह जगह मेरा स्थायी निवास है। दलाई लामा ने ये बात यह बात हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में कही है। जब उनसे तवांग गतिरोध के मद्देनजर चीन के लिए उनके संदेश के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि चीजें सुधर रही हैं।

यूरोप, अफ्रीका और एशिया में चीन अधिक लचीला है। लेकिन चीन लौटने का कोई मतलब नहीं है। मैं भारत को पसंद करता हूं। इससे पहले वो हर मौके पर ये बात साफ कर चुके हैं कि वो भारत से प्यार करते हैं और यहीं पर जिंदगी बिताएंगे।

मार्च 1959 में दलाई लामा चीनी सेना से बचकर भारत में दाखिल हुए थे। वो सबसे पहले अरुणाचल प्रदेश के तवांग और फिर 18 अप्रैल को असम के तेजपुर पहुंचे। 1962 युद्ध का एक बड़ा कारण इसको भी माना जाता है। चीन का कहना था कि दलाई लामा को शरण न दी जाए। लेकिन भारत ने उनको शरण दी थी।

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