हिमाचल प्रदेश के अस्तित्व में आने से लेकर अब तक प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति : मंत्री सरवीण चौधरी

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शिक्षा पर व्यय हो रहे 8412 करोड़, वार्षिक पारितोषक वितरण समारोह में की शिरकत, सरवीण ने ड्ढ़म्भ स्कूल में शौचालय बनाने के लिए 2 लाख 10 हज़ार तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले बच्चों को 8 हजार देने की घोषणा की।
शाहपुर, 27 अगस्त – नितिश पठानियां
समाजिक  न्याय एवं अधिकारिता मंत्री सरवीण चौधरी ने कहा कि हिमाचल प्रेदश के अस्तित्व में आने से लेकर अब तक प्रदेश में शिक्षा  क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है । प्रदेश साक्षरता दर से देश में दूसरे स्थान पर हैं ।
1878 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाएँ , 931 राजकीय उच्च पाठशालाएँ , 131 राजकीय डिग्री महाविद्यालय , एक ललित कलामहाविद्यालय, 8 राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, 1एससीईआरटी तथा एक राजकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा क्षेत्र में क्रिया शील है।
पिछले 4 वर्षों में 52 राजकीय माध्यमिक पाठशालाओं को राजकीय उच्च पाठशालाओं को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में स्तरोन्नत किया। यह जानकारी समाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री सरवीण चौधरी  ने राजकीय उच्च पाठशाला डडम्ब के वार्षिकोत्सव के अवसर पर दी। उन्होंने इस अवसर पर विद्यालय के मेधावियों को पुरस्कृत भी किया।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने अपने सम्बोधन  में कहा कि प्रदेश में शिक्षा सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया है और चालू वित्त वर्ष में शिक्षा क्षेत्र  में 8412 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।उन्होंने कहा कि  प्रदेश में 58 राजकीय महाविद्यालय  तथा 80 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में वर्चुअल क्लास रूम स्थापित किये गए ।
उन्होंने बताया कि मेधा प्रोत्साहन  योजना के अंतर्गत  लगभग  838 से ज़्यादा  विद्यार्थी   लाभन्वित हुए जिसमें 2. 19 करोड़ व्यय किये गए । इसके अलावा स्वर्ण जयंती उत्कृष्ट विद्यालय योजना ,स्वर्ण जयंती सुपर 100 योजना, आईसीटी विद्यालय योजना, स्वर्ण जयंती उत्कृष्ट महाविद्यालय योजना  अटल  स्कूल वर्दी योजना ,अटल निर्मल जल योजना ,स्वर्ण जयंती ज्ञानोदय वलस्टर श्रेष्ठ विद्यालय जैसी अनेकों योजनाएं चला कर गुणात्मक शिक्षा से विद्यार्थियों के भविष्य को संवारा है।
सरवीण ने  कहा कि  आज के समाज में शिक्षा का महत्व कार्य काफी बढ़ चुका है। शिक्षा के उपयोग  तो उसे नई दिशा देने की आवश्यकता है। शिक्षा इस प्रकार की होनी चाहिए कि एक व्यक्ति अपने परिवेश से परिचित हो सकें। शिक्षा हम सभी के उज्जवल भविष्य के लिए एक बहुत ही आवश्यक साधन है। हम अपने जीवन में शिक्षा के इस साधन का उपयोग करके कुछ भी प्राप्त कर सकते हैं।
शिक्षा का उच्च स्तर लोगों की सामाजिक और पारिवारिक सम्मान तथा एक अलग पहचान बनाने में मदद करता है। शिक्षा का समय  सभी के लिए सामाजिक और व्यक्तिगत रूप से   बहुत महत्वपूर्ण समय होता है ,  यही कारण हमें शिक्षा हमारे जीवन में इतना महत्त्व रखती है।
सरवीण ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए 6 सूत्रीय कार्य योजना पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 का क्रियान्वयन, आई टी के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, मेधा प्रोत्साहन, समाज एवं अभिभावकों की भागीदारी, पर्यावरण एवं प्रकृति से परिचय तथा रोजगार एवं परामर्श है।
उन्होंने कहा कि छात्रों को शिक्षित करने के साथ-साथ कुशल बनाने के लिये भी सरकार प्रयासरत है। शिक्षा के माध्यम से ही हम व्यक्तित्व मानसिक कुशलता नैतिक और शारीरिक शक्ति का विकास करना सीखते हैं।
बिना उचित शिक्षा के एक व्यक्ति अपने जीवन के सभी शैक्षिक लाभों से वंचित रह जाता है। शिक्षा निजी और पेशेवर जीवन में सफलता की इकलौती कुंजी है। शिक्षा हमें विभिन्न प्रकार का ज्ञान और कौशल प्रदान करती है।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर  प्रांताध्यक्ष  शिक्षक   संघ  पवन कुमार , प्रधान डडम्ब अंजू , उप प्रधान इंद्रजीत ,  प्रधान  लदवाड़ा योग राज  चड्ढा ,  प्रधान घरोह प्रधान तिलक  शर्मा ,  पूर्व  ब्लॉक चेयरमैन अश्विनी  चौधरी , बीडीसी  पुन्नू राम , प्रधानाचार्य  डडम्ब जितेन्द्र  भराडिया , सहित अन्य स्कूलों के सभी  प्रधानाचार्य  , छात्र तथा अभिवावक उपस्थित रहे ।
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