सऊदी अरब में मौत से जंग लड़ रहा अंबोटा का मुनीश, एयर एंबुलेंस के लिए ₹8.90 लाख की दरकार

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हिमखबर डेस्क

एक बूढ़ी मां की पथराई आंखें घर की चौखट पर बेटे की सलामती की दुआ कर रही हैं, तो पत्नी उस दिन के इंतजार में है जब उसका सुहाग सकुशल लौटकर आएगा। लेकिन हजारों किलोमीटर दूर सऊदी अरब के एक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे मुनीश कुमार की वतन वापसी अब पैसों पर आकर अटक गई है।

हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के उपमंडल गगरेट की ग्राम पंचायत अंबोटा के रहने वाले मुनीश की दोनों किडनियां जवाब दे चुकी हैं और कई गंभीर बीमारियों ने उन्हें जकड़ लिया है।

डॉक्टरों का कहना है कि उनकी जान बचाने के लिए उन्हें जल्द से जल्द भारत ले जाना होगा। मुनीश की हालत इतनी नाजुक है कि वह सामान्य विमान से सफर नहीं कर सकते। उन्हें भारत लाने का एकमात्र विकल्प एयर एंबुलेंस है, जिसका खर्च करीब 8 लाख 90 हजार रुपए है। यही भारी-भरकम रकम अब मुनीश की सांसों और परिवार के बीच एक बड़ी दीवार बन गई है।

बेहतर भविष्य की तलाश में गया था विदेश, दर-दर भटकने को हुआ मजबूर

आर्थिक तंगी दूर करने और परिवार को बेहतर भविष्य देने के सपने लेकर मुनीश सऊदी अरब गया था। वहां उसे एक निजी कंपनी में ड्राइवर की नौकरी मिली। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन एक घटना के बाद उसकी नौकरी छिन गई।

इसके बाद मुनीश सऊदी की सड़कों पर भटकने लगा। कई दिनों तक भूखे-प्यासे रहने से उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति बिगड़ गई और परिवार से उसका संपर्क पूरी तरह टूट गया। भारत में परेशान परिजन हर दरवाजा खटखटाते रहे, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

अखबारों की खबर से चला पता, भारतीयों ने पहुंचाया अस्पताल

जब प्रशासन से कोई सफलता नहीं मिली तो परिजनों ने समाचार पत्रों का सहारा लिया। मुनीश के लापता होने की खबरें छपीं और सोशल मीडिया पर वायरल हुईं।

इन खबरों पर सऊदी में काम कर रहे कुछ भारतीय युवकों की नजर पड़ी। उन्होंने इंसानियत का फर्ज निभाते हुए मुनीश को खोज निकाला। उसकी दयनीय हालत देखकर उन्होंने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज चल रहा है।

सरकार से निराशा, अब समाज से ही आखिरी उम्मीद

परिजनों ने जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों से लेकर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री तक मदद की गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई ठोस सहायता नहीं मिल पाई है। समय तेजी से बीत रहा है।

मुनीश के परिवार ने अब समाज के दानवीर लोगों, सामाजिक संस्थाओं और सरकार से मार्मिक अपील की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते 8.90 लाख रुपए का प्रबंध हो जाए, तो एक बूढ़ी मां की गोद सूनी होने और एक पत्नी का सुहाग उजड़ने से बच सकता है।

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