हिमाचल के प्रसिद्ध पहाड़ी साहित्यकार रमेश मस्ताना की सड़क हादसे में मौत से साहित्य जगत में शोक की लहर है, वहीं, उनके बेटे ने हादसे को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं, बेटे का दावा है कि घायल पिता को करीब एक घंटे तक इधर-उधर घुमाया गया, जानिए पूरा मामला…
शाहपुर – नितिश पठानियां
प्रसिद्ध पहाड़ी साहित्यकार स्वर्गीय रमेश चंद्र मस्ताना की सड़क दुर्घटना में हुई मौत के मामले में अब उनके बेटे प्रियांकुर ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया है कि 5 नवंबर को लदवाड़ा के पास फोरलेन पर पीछे से तेज रफ्तार में आई इनोवा क्रिस्टा (HP 01 D 8732) ने उनके पिता की बाइक को जोरदार टक्कर मारी।
बेटे का दावा है कि हादसे के बाद गाड़ी में सवार लोग घायल रमेश मस्ताना को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के बजाय करीब एक घंटे तक इधर-उधर घुमाते रहे।
प्रियांकुर के अनुसार, उनके पिता 5 नवंबर, वीरवार को शाम करीब 5 बजे अपनी बाइक पर किसी निजी काम से राजोल गए थे। वापस लौटते समय शाम करीब 6 बजे लदवाड़ा चौक से कुछ आगे फोरलेन पर पीछे से आई तेज रफ्तार इनोवा ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी जोरदार थी कि उनके पिता उछलकर सड़क किनारे जा गिरे और उनका हेलमेट भी उतर गया। बेटे का कहना है कि इनोवा के दोनों फ्रंट एयरबैग खुल गए थे, जबकि बाइक का पिछला टायर भी जाम हो गया था।
अस्पताल पहुंचाने के बजाय इधर-उधर घुमाने का आरोप
प्रियांकुर ने बताया कि परिवार को सूचना मिली कि उनके पिता का शाहपुर फोरलेन पर एक्सीडेंट हुआ है और उन्हें शाहपुर अस्पताल ले जाया गया है। परिवार जब अस्पताल पहुंचा तो वहां इस तरह का कोई मामला दर्ज नहीं मिला। इसके बाद टांडा अस्पताल में भी जानकारी ली गई, लेकिन वहां भी कोई ऐसा केस नहीं मिला।
इसी दौरान परिवार को शाहपुर अस्पताल के गेट के पास क्षतिग्रस्त इनोवा क्रिस्टा दिखाई दी। बेटे के मुताबिक, गाड़ी रुकवाने पर उसमें सवार एक व्यक्ति अत्यधिक नशे की हालत में था और ठीक से बात भी नहीं कर पा रहा था।
जब परिवार ने गाड़ी की पिछली सीट पर देखा तो उनके पिता वहां घायल अवस्था में लेटे हुए थे। आरोप है कि चालक ने दरवाजा खोलने से इनकार कर दिया और गाड़ी लेकर वहां से भागने लगा।
परिवार ने पीछा कर पिता को गाड़ी से निकाला
प्रियांकुर का आरोप है कि परिवार ने गाड़ी का पीछा किया और शाहपुर में आर्मी कैंटीन के पास स्थित चौक पर उसे दोबारा रोकने का प्रयास किया। इस दौरान चालक ने कथित तौर पर गाड़ी रोकने के बजाय उन्हें कुचलने की कोशिश की। हालांकि, आगे से वाहन आने के कारण गाड़ी आगे नहीं बढ़ सकी।
इसी बीच उन्होंने और उनके भाई ने गाड़ी का दरवाजा खोलकर अपने पिता को बाहर निकाला और अपनी गाड़ी में शाहपुर अस्पताल पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
मृतक के बेटे ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस को गाड़ी के बारे में सूचना देने के बावजूद करीब एक घंटे तक उसे कब्जे में नहीं लिया गया। बाद में पुलिस ने गाड़ी को पकड़ा और परिवार को तीन व्यक्तियों के चेहरे दिखाए।
प्रियांकुर का कहना है कि जब उन्होंने अपने पिता को इनोवा से बाहर निकाला था, उस समय गाड़ी कोई अन्य व्यक्ति चला रहा था, जबकि पुलिस की ओर से उन्हें बताया गया कि गाड़ी में तीसरा व्यक्ति भी मौजूद था और चालक के संबंध में अलग जानकारी दी गई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने केवल एक व्यक्ति का मेडिकल करवाया, जबकि घायल रमेश मस्ताना को गाड़ी में लेकर जाने वाले दूसरे व्यक्ति का मेडिकल नहीं करवाया गया।
निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
प्रियांकुर ने आशंका जताई है कि यदि परिवार समय पर मौके पर नहीं पहुंचता तो घायल पिता को किसी सुनसान स्थान पर ले जाया जा सकता था। उन्होंने सवाल उठाया कि दुर्घटना के तुरंत बाद घायल व्यक्ति को अस्पताल क्यों नहीं पहुंचाया गया।
उनका कहना है कि यदि समय रहते चिकित्सा सहायता मिलती तो संभव है कि उनके पिता की जान बचाई जा सकती थी। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दुर्घटना के समय वाहन चला रहे व्यक्ति की पहचान, सभी संबंधित व्यक्तियों का मेडिकल परीक्षण और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
प्रियांकुर ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया से परिवार का पक्ष प्रमुखता से उठाने की अपील की है। उन्होंने आम लोगों से भी इस मामले से जुड़ी जानकारी और तस्वीरों को अधिक से अधिक साझा करने का आग्रह किया है।

