हिमाचल के इस गांव में आज भी जिंदा है पुरखों की विरासत, स्वाद के साथ सेहत का भी खजाना

--Advertisement--

हिमाचल प्रदेश के एक गांव में आज भी पुरखों की पारंपरिक खानपान विरासत को सहेजकर रखा गया है, यहां के पारंपरिक व्यंजन न केवल स्वाद में खास हैं, बल्कि पौष्टिकता के लिहाज से भी अपनी अलग पहचान रखते हैं।

सिरमौर – नरेश कुमार राधे

आधुनिक दौर में जहां पैकेटबंद खाद्य पदार्थों ने रसोई में जगह बना ली है, वहीं जिला सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र के गांवों में पुरखों की विरासत आज भी उसी शिद्दत से संभाली जा रही है। हिमाचल निर्माता स्व. डॉ. यशवंत सिंह परमार के गृह गांव चनालग सहित अनेक गांवों में किसान आज भी मिट्टी के विशेष भाट में मक्की भूनकर और पानी से चलने वाले पारंपरिक घराट में पीसकर सत्तू तैयार कर रहे हैं।

यहां मक्की की फसल तैयार होते ही किसान सत्तू के लिए अलग मक्की रख लेते हैं। फिर शुरू होता है पारंपरिक सफर। मिट्टी के भाट में मक्की को भूना जाता है, इसी दौरान पहाड़ी व्यंजन मुड़े के लिए खरॉवकी भी तैयार होती है। भूनने के बाद मक्की को घराट में ले जाया जाता है, जहां बहते पानी की शक्ति से चलने वाले पत्थर के पाटों के बीच पिसाई होती है।

एक समय में घराट पहाड़ी अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा थे, आज भले ही आधुनिक मशीनें आ गई हों, लेकिन गिरिपार में इनकी पहचान आज भी कायम है। मक्की के सत्तुओं का सेवन खासतौर पर गर्मियों में लस्सी, दही, चटनी, राब और गुड़ के साथ किया जाता है। स्थानीय लोग इसे पौष्टिक आहार मानते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक बार तैयार करने के बाद करीब आठ महीने तक इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं

स्थानीय किसान रुद्री दत्त शर्मा, सुरेंद्र कमल, देवेंद्र शर्मा, विजय कुमार, वलमोहन ठाकुर और रामशरण बताते हैं कि वे हर साल 10 से 15 धिल्ले मक्की सत्तू के लिए अलग रखते हैं। अधिक भुनी मक्की को पशुओं के दाने के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

किसानों का कहना है कि यह परंपरा उन्हें बुजुर्गों से विरासत में मिली है। यह सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी और पुरखों से जुड़े रहने का माध्यम है। बाजार के स्वाद के आगे आज भी पहाड़ का यह पारंपरिक जायका भारी पड़ रहा है

--Advertisement--
--Advertisement--

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related