हिमाचल में 633 TGT बने हेडमास्टर, हाई स्कूलों में मिली तैनाती, ज्वाइनिंग की समयसीमा तय

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हिमाचल प्रदेश में 633 टीजीटी शिक्षकों को हेडमास्टर पद पर पदोन्नति मिली है, विभिन्न हाई स्कूलों में तैनाती के आदेश जारी, ज्वाइनिंग के लिए समयसीमा निर्धारित।

हिमखबर डेस्क 

हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग में हेडमास्टर पद पर पदोन्नति का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए बड़ी खबर है। निदेशालय स्कूल शिक्षा ने 633 शिक्षकों को हेडमास्टर पद पर पदोन्नत करने के आदेश जारी किए हैं।

विभाग ने 30 अक्तूबर, 2026 को जारी कार्यालय आदेश में इन शिक्षकों को हेडमास्टर और हेडमिस्ट्रेस के पद पर पदोन्नति देने के साथ सरकारी हाई स्कूलों में तैनाती भी दी है। पदोन्नति विभागीय पदोन्नति समिति की सिफारिशों के आधार पर की गई है।

इस आदेश के तहत उन सेवारत टीजीटी और पदोन्नत प्रवक्ताओं को शामिल किया गया है, जिन्हें 26 अप्रैल 2010 से पहले बिना विकल्प के पदोन्नत किया गया था और जिन्होंने निदेशालय के 11 दिसंबर 2025 के निर्देशों के अनुसार अब हेडमास्टर पद पर पदोन्नति का विकल्प चुना है।

वेतन स्तर-13 में मिलेगी पदोन्नति

शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार पदोन्नत शिक्षकों को संशोधित वेतन नियम, 2022 के तहत वेतन स्तर-13 में हेडमास्टर/हेडमिस्ट्रेस श्रेणी-दो (अराजपत्रित) के पद पर पदोन्नत किया गया है। सभी पदोन्नत शिक्षकों को आदेश में उनके नाम के सामने दर्शाए गए सरकारी हाई स्कूलों में तैनाती दी गई है।

संबंधित शिक्षकों को नए स्कूल में कार्यभार संभालने के बाद अपनी ज्वाइनिंग रिपोर्ट उचित माध्यम से शिक्षा निदेशालय को भेजनी होगी। इसके अलावा संबंधित उपनिदेशकों को भी कार्यभार ग्रहण करने की सूचना देनी होगी।

30 किलोमीटर तक एक दिन में करना होगा ज्वाइन

विभाग ने पदोन्नति के बाद नए स्थान पर कार्यभार संभालने के लिए समयसीमा भी निर्धारित की है। वित्त विभाग की 24 मई, 2023 की अधिसूचना के अनुसार 30 किलोमीटर या इससे कम दूरी पर तैनाती होने की स्थिति में एक दिन के भीतर, जबकि 30 किलोमीटर से अधिक दूरी होने पर पांच दिन के भीतर ज्वाइन करना होगा।

निर्धारित अवधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर पदोन्नति आदेश स्वत: वापस माने जाएंगे। ऐसे मामलों में संबंधित शिक्षक एक वर्ष या अगली विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक तक, जो भी बाद में हो, पदोन्नति से वंचित रहेगा।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि ज्वाइनिंग के लिए किसी भी स्थिति में अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा और पदोन्नति आदेश वापस लेने के लिए अलग से आदेश जारी नहीं होगा।

कार्यभार सौंपने से पहले होगी सेवा रिकॉर्ड की जांच

शिक्षा निदेशालय ने संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्यों, हेडमास्टरों और आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पदोन्नत शिक्षकों को कार्यमुक्त करने से पहले उनके सेवा संबंधी रिकॉर्ड की सावधानीपूर्वक जांच की जाए।

इसमें शिक्षक का नाम, वरिष्ठता क्रमांक और श्रेणी सहित अन्य विवरणों का सत्यापन करना होगा। यह भी सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित शिक्षक ने पहले प्रवक्ता या स्नातकोत्तर शिक्षक पद पर पदोन्नति का विकल्प न चुना हो, क्योंकि एक बार दिया गया विकल्प बदला नहीं जा सकता।

इसके अलावा यह भी जांचना होगा कि संबंधित शिक्षक को 26 अप्रैल, 2010 के बाद प्रवक्ता या स्नातकोत्तर शिक्षक के पद पर पदोन्नत तो नहीं किया गया है।

आदेश में कहा गया है कि न्यायालय के आदेशों के तहत एक सितंबर 2010 के बाद विकल्प की शर्त पर प्रवक्ता पद पर पदोन्नत किसी शिक्षक को इन निर्देशों के अनुसार कार्यमुक्त नहीं किया जाना है।

संबंधित शिक्षक के खिलाफ कोई विभागीय जांच या सतर्कता मामला लंबित होने की स्थिति में भी निर्धारित नियमों के अनुसार रिकॉर्ड की जांच आवश्यक होगी।

यदि पदोन्नत शिक्षक के सेवा विवरण में कोई वास्तविक त्रुटि सामने आती है, तो संबंधित स्कूल प्रबंधन को सीधे शिक्षा निदेशालय से स्पष्टीकरण लेना होगा। स्पष्टीकरण मिलने के बाद ही शिक्षक को नए स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने के लिए कार्यमुक्त किया जाएगा।

एक महीने में देना होगा वेतन निर्धारण का विकल्प

पदोन्नत शिक्षकों को वेतन निर्धारण के लिए भी निर्धारित समयसीमा का पालन करना होगा। विभागीय आदेश के अनुसार संबंधित शिक्षकों को मौलिक नियम-22 के प्रावधानों के तहत वेतन निर्धारण का विकल्प आदेश जारी होने के एक महीने के भीतर देना होगा।

वहीं, जो शिक्षक अपने नए पद पर कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से वेतन निर्धारण का विकल्प लेना चाहते हैं, उन्हें ज्वाइनिंग के एक महीने के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

प्रवक्ता या स्नातकोत्तर शिक्षक के पद से हेडमास्टर बनने वाले शिक्षकों को नियम-8 के तहत वेतन निर्धारण का लाभ उनके मूल संवर्ग यानी टीजीटी पद से ही मिलेगा। पदोन्नत शिक्षकों को नियमानुसार यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता और स्थानांतरण यात्रा भत्ता भी देय होगा।

पदोन्नति छोडऩे के लिए भी तय किए नियम

शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक हित में पदोन्नति से इनकार करने का किसी पदोन्नत शिक्षक को स्वत: अधिकार नहीं होगा और नियमानुसार पदोन्नति लागू की जा सकती है। यदि कोई शिक्षक पदोन्नति छोडऩे के लिए आवेदन करता है, तो उसके कारणों पर नियुक्ति प्राधिकारी विचार करेगा।

आवेदन स्वीकार होने की स्थिति में संबंधित शिक्षक को एक वर्ष या अगली विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक तक, जो भी बाद में हो, पदोन्नति के लिए अयोग्य माना जाएगा।

न्यायालय के फैसले के अधीन रहेंगे आदेश

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये पदोन्नतियां सर्वोच्च न्यायालय में हिमाचल प्रदेश सरकार बनाम सतीश कुमार मामले में लंबित विशेष अनुमति याचिका तथा हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में लंबित संबंधित याचिकाओं के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी।

इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय या राज्य सरकार की ओर से भविष्य में जारी किसी आदेश तथा प्रशासनिक कारणों से आवश्यक समीक्षा के आधार पर भी इन पदोन्नतियों में बदलाव किया जा सकता है।

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