हिमाचल के नैनिधार में एक गाय ने दो मुंह वाले बछड़े को जन्म दिया। प्रसव के दौरान गाय की हालत बिगड़ गई, जिसके बाद पशु फार्मासिस्ट ने कड़ी मशक्कत कर उसकी जान बचाई।
सिरमौर – नरेश कुमार राधे
सिरमौर जनपद के शिलाई उपमंडल के नैनिधार गांव में एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां किसान अजय ठाकुर की गाय ने एक ऐसे बछड़े को जन्म दिया, जिसके दो मुंह थे। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में इस तरह का मामला पहली बार सामने आया है। हालांकि जन्म के बाद बछड़े को बचाया नहीं जा सका, लेकिन समय रहते उपचार मिलने से गाय की जान बच गई।
जानकारी के अनुसार गाय को प्रसव के दौरान करीब 7 से 8 घंटे तक लगातार पीड़ा होती रही। लंबे समय तक प्रसव न होने के कारण गाय की हालत बिगड़ने लगी। इसकी सूचना मिलने पर पशु औषधालय में तैनात वेटरनरी फार्मासिस्ट चमेल ठाकुर मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति को देखते हुए आवश्यक उपचार और प्रयास शुरू किए।
बताया गया कि प्रसव की स्थिति बेहद कठिन थी और गाय को बचाना भी चुनौतीपूर्ण हो गया था। चमेल ठाकुर ने काफी देर तक कड़ी मशक्कत की और आवश्यक उपचार करते हुए आखिरकार गाय की जान बचाने में सफलता हासिल की। हालांकि, दो मुंह वाले बछड़े को बचाया नहीं जा सका।
पशु मालिक अजय ठाकुर ने बताया कि चमेल ठाकुर की ड्यूटी उक्त क्षेत्र में नहीं थी, इसके बावजूद उन्होंने सूचना मिलने पर मानवीय आधार पर मौके पर पहुंचकर गाय का उपचार किया। उन्होंने इस सेवा के लिए फार्मासिस्ट का आभार जताते हुए कहा कि यदि समय पर मदद नहीं मिलती तो गाय की जान भी खतरे में पड़ सकती थी।
अजय ठाकुर के अनुसार चमेल ठाकुर ने इस पूरी सेवा के लिए उनसे किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया। ग्रामीणों ने भी फार्मासिस्ट की तत्परता और सेवाभाव की सराहना की है। ग्रामीणों का कहना है कि दूरदराज क्षेत्रों में पशुपालकों के लिए पशु चिकित्सा सेवाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में ड्यूटी से आगे बढ़कर जरूरतमंद की मदद करने वाले कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से चमेल ठाकुर को उनकी सेवाभावना और तत्परता के लिए सम्मानित करने की मांग की है। यह घटना जहां अपने आप में क्षेत्र के लिए बेहद असामान्य रही, वहीं पशु फार्मासिस्ट की तत्परता ने एक बेजुबान पशु की जान बचाकर मानवीय संवेदना की मिसाल भी पेश की है।

