हिमाचल में स्वाइन फ्लू को लेकर सतर्कता बढ़ रही है। जानिए स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण क्या हैं, किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है और कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
शाहपुर – नितिश पठानियां
हिमाचल प्रदेश में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 को लेकर चिंता बढ़ रही है। कांगड़ा में संक्रमण के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग निगरानी कर रहा है। वहीं बिलासपुर में एक व्यक्ति की एच1एन1 संक्रमण के बाद मौत की खबर भी सामने आई है। ऐसे में लोगों के मन में कई सवाल हैं- स्वाइन फ्लू कितना खतरनाक है, इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं, सामान्य वायरल और स्वाइन फ्लू में क्या अंतर है और इससे बचने के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
आखिर ये स्वाइन फ्लू है क्या?
स्वाइन फ्लू इन्फ्लुएंजा ए वायरस से होने वाला एक संक्रमण है। इसका एक प्रमुख प्रकार एच1एन1 है। यह मुख्य रूप से सांस की बीमारी है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस के जरिए निकलने वाले कणों से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। भीड़भाड़ वाली जगहों और संक्रमित व्यक्ति के नजदीकी संपर्क में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। शुरुआत में सामान्य वायरल जैसा दिखता है स्वाइन फ्लू की शुरुआत कई बार सामान्य वायरल बुखार जैसी होती है। इसी कारण लोग इसे साधारण बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं
बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना, थकान और कमजोरी, हर व्यक्ति में सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है।
सामान्य वायरल और स्वाइन फ्लू में कैसे करें अंतर?
सिर्फ लक्षण देखकर यह पक्का पता लगाना मुश्किल है कि किसी व्यक्ति को सामान्य वायरल संक्रमण है या एच1एन1। दोनों में बुखार, खांसी, गले में खराश और शरीर में दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। एच1एन1 की पुष्टि जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच और परीक्षण से ही की जाती है। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से दवा शुरू करना उचित नहीं है।
ये लक्षण दिखें तो न करें देरी
फ्लू जैसे लक्षणों के साथ यदि मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगे, सीने में दर्द हो, अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, लगातार तेज बुखार बना रहे या स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ रहा हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। खास तौर पर छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
स्वाइन फ्लू से कैसे बचें?
- स्वाइन फ्लू से बचने के लिए रोजमर्रा की कुछ सावधानियां काफी महत्वपूर्ण हैं।
- हाथ बार-बार धोएं: साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ साफ करें।
- खांसते-छींकते समय मुंह ढकें: टिश्यू या कोहनी के अंदरूनी हिस्से का इस्तेमाल करें।
- बीमार होने पर घर पर आराम करें: बुखार या खांसी होने पर अनावश्यक रूप से भीड़ में जाने से बचें।
- दूसरों से दूरी रखें: फ्लू जैसे लक्षण होने पर खासकर बुजुर्गों और छोटे बच्चों के नजदीकी संपर्क से बचें।
- चेहरे को बार-बार न छुएं: आंख, नाक और मुंह को गंदे हाथों से छूने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
क्या हर बुखार स्वाइन फ्लू है?
नहीं।
बुखार और खांसी होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को स्वाइन फ्लू ही है। कई अन्य वायरल संक्रमणों में भी इसी तरह के लक्षण दिखाई देते हैं। इसलिए घबराने के बजाय लक्षणों पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
क्या स्वाइन फ्लू का इलाज संभव है?
हां ज्यादातर मरीज उचित चिकित्सकीय देखभाल से ठीक हो जाते हैं। कुछ मरीजों में डॉक्टर एंटीवायरल दवाओं की सलाह दे सकते हैं। दवा और उपचार मरीज की उम्र, स्वास्थ्य और बीमारी की गंभीरता के आधार पर तय किया जाता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीवायरल या दूसरी दवाएं लेना उचित नहीं है।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?स्वाइन फ्लू से होने वाली जटिलताओं का खतरा कुछ लोगों में अधिक हो सकता है। इनमें—
बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोग, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग शामिल हो सकते हैं।
इन लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए।
सबसे जरूरी बात
हिमाचल में एच1एन1 के मामले सामने आने के बीच लोगों को डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी जरूरी है। सामान्य स्वच्छता का ध्यान रखें, फ्लू जैसे लक्षण होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखें और गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। याद रखें—हर बुखार स्वाइन फ्लू नहीं है, लेकिन सांस लेने में परेशानी और तेजी से बिगड़ती तबीयत को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।हिमाचल में
अब तक दो मौतें
हिमाचल प्रदेश में अब तक एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू से जुड़ी दो मौतें रिपोर्ट की गई हैं। हालांकि, हाल ही में बिलासपुर निवासी 64 वर्षीय मरीज की मौत के मामले में आईजीएमसी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरीज पहले से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा था। ऐसे में मौत को केवल एच1एन1 संक्रमण से जोड़ना उचित नहीं होगा। प्रदेश में सामने आ रहे संक्रमण के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की निगरानी बढ़ गई है और लोगों को फ्लू जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी जा रही है।

