एक साल बीत गया पर नहीं मिला वेतन

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शिमला – नितिश पठानियां 

सोशल ऑडिट कर्मचारियों ने राज्य सरकार से पांच करोड़ रुपए की ग्रांट मांगी है। प्रदेश भर में वर्ष 2017 से तैनात 423 कर्मचारी पंचायतों में मनरेगा का सोशल ऑडिट कर रहे हैं। इन कर्मचारियों को नियमित वेतन नहीं दिया जा रहा है।

कर्मचारी स्थायी नीति बनाने की भी मांग कर रहे हैं। इस संबंध में सोशल ऑडिट कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सोमवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मुलाकात की है।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि एक साल तीन महीने से सोशल ऑडिट कर रहे कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पाया है। कर्मचारियों का कहना है कि उनके लिए मनरेगा के तहत स्थायी नीति का निर्माण किया जाए।

उन्होंने कहा कि इस समय मनरेगा के साथ ही मिड-डे मील, प्रधानमंत्री आवास योजना, राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा सहायता, भवन निर्माण कल्याण कामगार बोर्ड की योजनाओं का सामाजिक अंकेक्षण सोशल ऑडिट कर्मचारी कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भविष्य में वन अधिकार अधिनियम के तहत भी जारी होने वाले आदेशों को लेकर कर्मचारी जिम्मा उठाने के लिए तैयार हैं।

सामाजिक अंकेक्षण इकाई में तैनात खंड संसाधन व्यक्ति को पांच सौ रुपए प्रति कार्यदिवस, जबकि ग्राम संसाधन व्यक्ति को 300 रुपए प्रति कार्य दिवस के रूप में भुगतान किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सोशल ऑडिट कर्मचारियों को मनरेगा से भुगतान किया जाना चाहिए।

उधर, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि सामाजिक अंकेक्षण से जुड़े कर्मचारियों की जो मांगें ध्यान में लाई गई हैं, उन पर सहाुनभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा।

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