
ब्यूरो – रिपोर्ट
कलोल में चल रही भागवत कथा में प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य प्रद्युम्न शुक्ला जी ने कहा कि भागवत कोई ग्रंथ नहीं, किताब नहीं बल्कि साक्षात कृष्ण का स्वरूप है। विष्णु भगवान ने चार मंत्र ब्रह्मा जी को दिए।
ब्रह्मा जी ने वही चार मंत्र नारद जी के कान में दिए। फिर नारद जी ने श्री व्यास ऋषि जी को यह मंत्र दिए। अतः चार मंत्रों के आधार पर ही व्यास मुनि ने संपूर्ण शास्त्रों के साथ श्रीमद् भागवत पुराण की रचना की।
श्री कृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए व्यास जी ने कहा कि जन्म लेने से पहले कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को प्रभु ने सोचा कि माता यशोदा भाग्यशाली इसलिए है कि मैं उनका दुग्ध पान करूंगा ।
माता देवकी पुण्य आत्मा इसलिए है कि मैं उनके गर्भ से जन्म लूंगा। लेकिन मां रोहिणी को क्या मिला। इसलिए जब मैं जन्म लूंगा तब रोहिणी नक्षत्र में ही लूंगा।
इसलिए भादो महीने के कृष्ण पक्ष में रात्रि के 12:00 बजे जैसे ही पूर्व दिशा की कोख में दूधिया चांद का उदय हुआ तू ही देवी रूपिणी देवकी की कोख से कृष्ण भगवान का प्राकट्य हुआ।
इस प्रकार कृष्ण जन्म के साथ सारी जनता भावविभोर होकर झूम उठी। “हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की” यह कहते हुए सारा पंडाल झूम पड़ा।
