काँगड़ा में 304 CSC सेंटर से ग्रामीणों को घर-द्वार पर मिल रहीं डिजिटल सेवाएं, स्थानीय स्तर पर मिल रहा स्वरोजगार

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कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) ग्रामीण नागरिकों को घर-द्वार के नजदीक डिजिटल सेवाएं उपलब्ध करवाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, जिले में 14.89 करोड़ रुपये की लागत से 304 कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किए गए हैं, इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं का लाभ मिल रहा है, वहीं CSC संचालक यानी विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर (VLE) स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार भी प्राप्त कर रहे हैं।

हिमखबर डेस्क

ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं और ई-गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) और काॅमन सर्विस सेंटर (सीएससी) नेटवर्क के बीच समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण लोगों को विभिन्न सरकारी एवं डिजिटल सेवाएं उनके नजदीकी क्षेत्र में उपलब्ध करवाना है, ताकि उन्हें छोटी-छोटी सेवाओं के लिए शहरों अथवा दूर-दराज के सरकारी कार्यालयों का रुख न करना पड़े।

आरजीएसए के तहत ग्राम पंचायत भवनों में को-लोकेटेड सीएससी स्थापित किए जा रहे हैं। इससे पंचायत भवन स्थानीय स्तर पर डिजिटल सेवा वितरण के केंद्र के रूप में विकसित किए जा रहे हैं और ग्रामीणों को एक ही स्थान पर विभिन्न सरकारी सेवाओं का लाभ मिल रहा है।

जिला पंचायत अधिकारी सचिन ठाकुर ने बतया कि कांगड़ा जिले में वर्तमान में 304 काॅमन सर्विस सेंटर कार्यरत हैं, जिनकी स्थापना एवं संबंधित गतिविधियों पर अब तक 14 करोड़ 89 लाख रुपये व्यय किए जा चुके हैं। इन सीएससी के माध्यम से ग्रामीण नागरिकों को एक ही स्थान पर अनेक सरकारी एवं डिजिटल सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। इससे लोगों की सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान होने के साथ-साथ समय और यात्रा पर होने वाले खर्च में भी कमी आई है।

ग्राम पंचायत भवनों में स्थापित को-लोकेटेड सीएससी को सिंगल विंडो सेवा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को 170 से अधिक डिजिटल एवं ई-गवर्नेंस सेवाएं उपलब्ध करवाने की व्यवस्था है। इनमें आधार नामांकन एवं बायोमेट्रिक अपडेट, बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं, डिजी-पे के माध्यम से नकद निकासी, विभिन्न ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाएं तथा जन्म, मृत्यु, आय और जाति प्रमाण-पत्र से संबंधित सेवाएं शामिल हैं।

इस व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर उपलब्ध आधारभूत ढांचे का उपयोग डिजिटल सेवाओं को ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। पंचायत भवनों में सीएससी के लिए स्थान उपलब्ध करवाने के साथ-साथ बिजली, इंटरनेट कनेक्टिविटी और अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

जिन क्षेत्रों में पंचायत भवन उपलब्ध नहीं हैं, वहां पंचायत भवनों के निर्माण के लिए आरजीएसए के तहत सहायता का प्रावधान भी ग्रामीण प्रशासन के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने में सहायक हो रहा है।

सीएससी के संचालन में वीएलई यानी विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ये स्थानीय स्तर पर नागरिकों को विभिन्न आॅनलाइन एवं डिजिटल सेवाएं उपलब्ध करवाते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार तथा माइक्रो-एंटरप्रेन्योरशिप के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

आरजीएसए के तहत केवल भौतिक आधारभूत ढांचे के निर्माण पर ही नहीं, बल्कि डिजिटल क्षमता निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वीएलई, पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित कर्मचारियों को डिजिटल सेवाओं, आॅनलाइन पोर्टल, ई-गवर्नेंस प्रणालियों तथा नागरिक सेवा वितरण की प्रक्रिया से संबंधित प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण प्रदान किया जाता है।

कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी और अन्य आवश्यक आईटी सुविधाओं की उपलब्धता से पंचायत स्तर पर डिजिटल सेवाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है।

धर्मशाला के समीप बल्ला जदरांगल में सीएससी संचालित कर रहे स्नातक मनोज कुमार तथा चैतड़ू में सीएससी संचालक साहिल, जो सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक और एमबीए हैं, ने बताया कि सरकार की इस पहल से उन्हें अपने घर के समीप ही स्वरोजगार का अवसर मिला है। वे अपने क्षेत्र के ग्रामीणों को विभिन्न डिजिटल एवं सरकारी सेवाएं उपलब्ध करवाकर उनकी सुविधा के साथ-साथ अपनी आजीविका भी सुनिश्चित कर रहे हैं।

वहीं, बल्ला जदरांगल की ग्रामीण रूचि और सीमा तथा चैतड़ू की पलक ने बताया कि गांव के समीप सीएससी सुविधा उपलब्ध होने से उन्हें विभिन्न सरकारी सेवाओं और दस्तावेजों से संबंधित कार्य करवाने के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। इससे उनके समय और आने-जाने के खर्च की बचत हो रही है तथा कई सेवाएं उन्हें अपने क्षेत्र में ही आसानी से उपलब्ध हो रही हैं।

इस प्रकार आरजीएसए और सीएससी का समन्वय ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सशक्तिकरण, स्वरोजगार, वित्तीय समावेशन और पंचायत स्तर पर सेवा वितरण को मजबूत करने के साथ-साथ गांवों तक शासन और सरकारी सेवाओं की पहुंच को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

उपायुक्त हेमराज बैरवा ने बताया कि कांगड़ा जिला में अब तक लगभग 304 काॅमन सर्विस सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। इन केंद्रों का संचालन ग्रामीण स्तर पर स्थानीय लोगों के माध्यम से किया जा रहा है। इन केंद्रों के जरिए लोगों को सरकार की विभिन्न योजनाओं और जनहित से जुड़ी आवश्यक सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

समय की आवश्यकता को देखते हुए इन सभी काॅमन सर्विस सेंटरों को धीरे-धीरे पंचायत मुख्यालयों में स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसके तहत आरजीएसए योजना के अंतर्गत भी कई स्थानों का चयन किया गया है और यह प्रक्रिया जारी है। सरकार का मुख्य उद्देश्य लोगों को सेवाएं उनके घर-द्वार के नजदीक उपलब्ध करवाना है।

ताकि उन्हें छोटे-छोटे कार्यों के लिए जिला और अन्य सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर न काटने पड़ें। स्थानीय स्तर पर सेवाएं मिलने से लोगों के समय की बचत होगी और उन्हें सुविधाजनक तरीके से सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।

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