PMFME योजना में मंडी की बड़ी उपलब्धि, हिमाचल में तीसरे स्थान पर जिला; 328 आवेदन मंजूर

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प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना यानी PMFME में मंडी जिले ने हिमाचल प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है, जिले के 328 आवेदन अनुमोदित हो चुके हैं, जिससे खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में स्वरोजगार के नए अवसर बढ़ रहे हैं।

हिमखबर डेस्क

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (पीएमएफएमई) के प्रभावी क्रियान्वयन में जिला मंडी ने प्रदेश में तृतीय स्थान प्राप्त किया है। योजना के तहत जिले में अब तक 328 आवेदन अनुमोदित किए जा चुके हैं। इससे जिले में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को नई गति मिलने के साथ-साथ स्थानीय उद्यमियों और युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।

उपायुक्त अपूर्व देवगन की अध्यक्षता में मंगलवार को जिला स्तरीय समिति (डीएलसी) की बैठक में यह आंकड़े प्रस्तुत किए गए। बैठक में 20 मार्च, 2026 तथा 12 अगस्त, 2026 को आयोजित डीएलसी बैठकों की कार्यवाही की समीक्षा भी की गई तथा समिति द्वारा 20 नए प्रकरणों को अनुमोदित किया गया।

उपायुक्त ने योजना के तहत अब तक हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि योजना के अंतर्गत आने वाले प्रकरणों में विविधता पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि जिले में अनाज, फल, सब्जियां, दुग्ध उत्पाद, मसाले तथा हर्बल एवं औषधीय उत्पादों सहित विभिन्न प्रकार की सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि पीएमएफएमई योजना की जानकारी जिले के दूर-दराज क्षेत्रों तक पहुंचाई जाए, ताकि अधिक से अधिक पात्र युवा एवं उद्यमी योजना का लाभ उठाकर स्वरोजगार स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

बैठक के दौरान जिला उद्योग केंद्र, मंडी की महाप्रबंधक नेहा चौहान ने योजना की वर्तमान स्थिति, प्राप्त आवेदनों, उनकी प्रगति तथा बैंक स्तर पर स्वीकृति की स्थिति के संबंध में विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत डीएलसी के समक्ष योजना शुरू होने से अब तक कुल 343 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 305 आवेदनों की अनुशंसा की जा चुकी है तथा 209 आवेदन बैंकों द्वारा स्वीकृत किए गए हैं।

योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 35 प्रतिशत तक क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी, अधिकतम 10 लाख रुपये तक प्रदान की जाती है। इससे सूक्ष्म उद्यमियों को खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, विस्तार एवं आधुनिकीकरण में सहायता मिलती है।

ये रहे उपस्तिथ

बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त प्रियांशु खाती, जिला विकास अधिकारी (ग्रामीण विकास) गोपी चंद पाठक, जिला कृषि अधिकारी गोपाल चंद, उद्यान विभाग की एसएमएस प्रिया गौतम, खंड विकास अधिकारी सुरेंद्र कुमार, लीड बैंक प्रबंधक चंद्र प्रकाश, डीडीएम नाबार्ड राकेश वर्मा, स्वयं सहायता समूहों व एफपीओ के प्रतिनिधि तथा समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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