स्कूलों में पढ़ाई के निर्धारित समय को प्रभावित करने वाले लंबे भाषण और कार्यक्रमों को लेकर नई व्यवस्था की तैयारी है, निजी आयोजनों पर रोक लगाने से विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए अधिक समय सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
हिमखबर डेस्क
सूबे के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के बीच होने वाले लंबे कार्यक्रमों, भाषणों और निजी आयोजनों का समय अब कम हो सकता है। हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने स्कूलों में पढ़ाई के लिए अधिक समय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से निजी स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों पर रोक लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है। यह प्रस्ताव सरकार की मंजूरी के लिए भेजा गया है।
प्रस्ताव के अनुसार सरकारी मंत्रियों के कार्यक्रमों को छोड़कर स्कूल परिसरों में निजी स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को रोकने की तैयारी है। शिक्षा विभाग का मानना है कि ऐसे आयोजनों के दौरान छात्रों की पढ़ाई और शिक्षकों का कक्षा में शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। कार्यक्रमों में छात्रों और शिक्षकों के शामिल होने से कक्षा में पढ़ाई का समय कम हो जाता है।
विभाग ने स्कूलों में होने वाले लंबे कार्यक्रमों को सीमित करने का भी प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही स्कूल प्रधानाचार्यों के लंबे भाषणों को भी सीमित करने की बात कही गई है। सामाजिक संस्थाओं की ओर से स्कूल परिसरों में आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।
शिक्षा विभाग का मुख्य जोर छात्रों और शिक्षकों के लिए कक्षा में पढ़ाने और पढ़ने का अधिक समय सुनिश्चित करने पर है। विभाग इसके लिए शिक्षकों के वास्तविक शिक्षण कार्य का जिला स्तर पर आकलन करने की तैयारी भी कर रहा है। इस दौरान यह देखा जाएगा कि शिक्षक कितने दिन स्कूल में उपस्थित रहे और इनमें से कितने दिन उन्होंने वास्तव में कक्षाएं लीं।
इसी तरह छात्रों की उपस्थिति और उनकी छुट्टियों का भी जिला स्तर पर आकलन किया जा सकता है। इसके आधार पर स्कूलों में शिक्षण दिवस और कक्षा में छात्रों तथा शिक्षकों के बिताए गए समय की स्थिति की रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
शिक्षा विभाग का मानना है कि स्कूलों में होने वाली गैर-शैक्षणिक गतिविधियों में लगने वाले समय को सीमित करने से शिक्षण कार्य के लिए अधिक समय उपलब्ध होगा। प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी मिलने के बाद स्कूलों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। फिलहाल यह प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है और इसकी अंतिम मंजूरी के बाद ही नए प्रावधान लागू होंगे।

