रेणुका जी जू में 11 साल बाद रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ा पहुंचने वाला है। जंगली मुर्गे के बदले चिड़ियाघर को बाघों की जोड़ी मिली है।
सिरमौर – नरेश कुमार राधे
एक दौर था, जब श्री रेणुका जी की पहाड़ियों में शेरों की दहाड़ गूंजती थी। करीब एक दशक बाद वही दहाड़ एक नए अंदाज में लौटने जा रही है, इस बार शेरों की नहीं, रॉयल बंगाल टाइगर की। नागपुर के बाला साहेब ठाकरे गोरेवाड़ा अंतरराष्ट्रीय प्राणी उद्यान से रॉयल बंगाल टाइगर का एक जोड़ा करीब 1700 किलोमीटर का सफर तय कर रविवार दोपहर करीब दो बजे श्री रेणुका जी पहुंच गया है।
यह सिर्फ सिरमौर के लिए नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल के वन्यजीव पर्यटन के लिहाज से बड़ा घटनाक्रम है। पहाड़ी प्रदेश हिमाचल प्रदेश में पहली बार टाइगर रखे जा रहे हैं। जोड़े में मादा टाइगर की उम्र 3 वर्ष और नर की उम्र 5 वर्ष है। कपल को विशेष सुरक्षा इंतजामों के साथ नागपुर से श्री रेणुका जी लाया गया।
वन विभाग की तैयारी के मुताबिक 2 अक्टूबर से पर्यटकों को टाइगरों का दीदार करवाने का लक्ष्य रखा गया है। यदि स्वास्थ्य परीक्षण और अनुकूलन प्रक्रिया तय योजना के अनुसार पूरी होती है, तो दशहरा और आगामी पर्यटन सीजन में रेणुकाजी पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए यह सबसे नया आकर्षण होगा।
जंगली मुर्गे की अदला-बदली में आया ‘टाइगर कपल’
रेणुका जी में टाइगर कपल की एंट्री के पीछे एक दिलचस्प वन्यजीव एक्सचेंज भी है। रॉयल बंगाल टाइगर के इस जोड़े के बदले जंगली मुर्गे का एक जोड़ा दिया गया है। सुनने में यह अदला-बदली भले ही हैरान करने वाली लगे, लेकिन चिड़ियाघरों में वन्यजीवों का आदान-प्रदान प्रबंधन और प्रजनन योजनाओं के तहत किया जाता है।
रेणुका जी के लिए इस एक्सचेंज तक पहुंचना भी आसान नहीं था, टाइगर लाने की प्रक्रिया करीब चार से पांच साल तक चली। आखिरकार नागपुर के गोरेवाड़ा जू से टाइगर कपल को रेणुका जी लाने की मंजूरी मिली और अब 1700 किलोमीटर दूर से आए ये दोनों यहां की नई पहचान बनने को तैयार हैं।

शेड्यूल-वन श्रेणी, इसलिए सुरक्षा के खास इंतजाम
रॉयल बंगाल टाइगर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत शेड्यूल-वन श्रेणी में आता है, लिहाजा नागपुर से रेणुका जी तक इसके परिवहन में विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाए गए। जोड़े को विशेष रूप से तैयार खुले ट्रक में लाया गया और करीब 1700 किलोमीटर के पूरे सफर के दौरान उनकी सेहत, सुरक्षा और व्यवहार पर लगातार निगरानी रखी गई।
साथ चल रही विशेषज्ञ टीम ने लंबी यात्रा को ध्यान में रखते हुए जरूरी सावधानियां बरतीं, ताकि रेणुका जी पहुंचने तक टाइगर पूरी तरह सुरक्षित रहें। रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ा शुक्रवार शाम करीब 6 बजे महाराष्ट्र के नागपुर स्थित गोरेवाड़ा से श्री रेणुका जी के लिए रवाना हुआ था।
लंबे सफर के दौरान वन्य प्राणी विंग शिमला डिवीजन के डीएफओ डॉ. शाहनवाज अहमद के नेतृत्व में 8 सदस्यीय टीम लगातार साथ रही। महाराष्ट्र से शुरू हुआ सफर मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा से होते हुए हिमाचल प्रदेश तक पहुंचा। लंबी दूरी को देखते हुए परिवहन के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। 29 शेरों की दहाड़, टाइगर जोड़े का बसेरा श्री रेणुका जी लायन सफारी का इतिहास भी इस कहानी को खास बनाता है।
शेड्यूल-वन श्रेणी, इसलिए सुरक्षा के खास इंतजाम
रॉयल बंगाल टाइगर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत शेड्यूल-वन श्रेणी में आता है, इसलिए नागपुर से रेणुकाजी तक इसके परिवहन में विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाए गए। दोनों टाइगरों को विशेष रूप से तैयार खुले ट्रक में लाया गया और करीब 1700 किलोमीटर के पूरे सफर के दौरान उनकी सेहत, सुरक्षा और व्यवहार पर लगातार निगरानी रखी गई।
साथ चल रही विशेषज्ञ टीम ने लंबी यात्रा को ध्यान में रखते हुए जरूरी सावधानियां बरतीं, ताकि रेणुकाजी पहुंचने तक दोनों टाइगर पूरी तरह सुरक्षित रहें। वर्ष 1975 में जूनागढ़ से शेरों का एक जोड़ा यहां लाया गया था। समय के साथ इनका कुनबा बढ़ा और एक समय रेणुका जी में करीब 29 शेर और शेरनियां मौजूद थीं। लेकिन बाद में इनब्रीडिंग (Inbreeding) और आनुवंशिक समस्याओं के चलते इनकी संख्या घटती गई।
वर्ष 2015 में रेणुका जी के आखिरी शेर की मौत के साथ यहां की लायन सफारी की दहाड़ हमेशा के लिए खामोश हो गई। करीब 11 साल बाद उसी कहानी का नया अध्याय शुरू हो रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार रेणुकाजी की पहचान एशियाई शेर नहीं, रॉयल बंगाल टाइगर बनने जा रहा है।

1700 किलोमीटर का सफर, श्री रेणुका जी में नया ठिकाना
नागपुर से टाइगर के जोड़े को विशेष सुरक्षा और निगरानी के बीच रेणुका जी लाया गया है। यहां पहुंचने के बाद उन्हें तत्काल पर्यटकों के सामने नहीं लाया जाएगा। नए वातावरण में ढलने के लिए पहले उन्हें विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाएगा।
योजना के मुताबिक करीब 10 दिन तक इनडोर वार्ड में निगरानी के बाद उनके स्वास्थ्य और व्यवहार का आकलन किया जाएगा। सब कुछ सामान्य रहने पर उन्हें खुले आउटडोर इनक्लोजर में शिफ्ट किया जाएगा। इसके बाद पर्यटकों को पहली बार हिमाचल के इस मिनी जू में रॉयल बंगाल टाइगर का दीदार होगा।

