हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश और पूरे देश के लिए शुक्रवार का दिन एक भावुक खबर लेकर आया। भारतीय सेना के पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल विश्वनाथ शर्मा (वी. एन. शर्मा) का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने शुक्रवार तड़के नई दिल्ली में अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार 1 अगस्त को दिल्ली छावनी स्थित बरार स्क्वायर श्मशान घाट में पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया जाएगा।
कांगड़ा जिले से संबंध रखने वाले जनरल वी. एन. शर्मा केवल हिमाचल ही नहीं, बल्कि भारतीय सेना के इतिहास की एक प्रेरणादायक शख्सियत थे। उन्होंने 1 मई 1988 से 30 जून 1990 तक भारतीय सेना के 15वें थल सेनाध्यक्ष के रूप में देश की सेवा की।
यह वह दौर था, जब देश कई सुरक्षा चुनौतियों और संवेदनशील परिस्थितियों का सामना कर रहा था। ऐसे समय में उनके नेतृत्व ने भारतीय सेना को मजबूती और स्पष्ट दिशा प्रदान की।
वीरों के परिवार से था गहरा नाता
4 जून 1930 को जन्मे जनरल विश्वनाथ शर्मा का परिवार देशभक्ति और सैन्य सेवा की मिसाल माना जाता है। उनके पिता मेजर जनरल अमरनाथ शर्मा भारतीय सेना से सेवानिवृत्त अधिकारी थे।
उनके बड़े भाई मेजर सोमनाथ शर्मा आज़ाद भारत के पहले मरणोपरांत परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले अमर शहीद थे, जिन्होंने 1947-48 के भारत-पाक युद्ध में सर्वोच्च बलिदान दिया।
वहीं उनके दूसरे भाई लेफ्टिनेंट जनरल सुरेंद्र नाथ शर्मा भारतीय सेना में इंजीनियर-इन-चीफ के पद तक पहुंचे। उनकी बहन मेजर डॉ. कमला तिवारी भी भारतीय सेना की मेडिकल कोर में सेवाएं दे चुकी थीं। इस परिवार ने पीढ़ियों तक राष्ट्र सेवा को अपना सर्वोच्च धर्म माना।
1950 में शुरू हुआ गौरवशाली सैन्य सफर
स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद जनरल शर्मा भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), देहरादून के पांचवें रेगुलर कोर्स में शामिल हुए और 4 जून 1950 को उन्हें 16वीं लाइट कैवेलरी में कमीशन मिला। उन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध में लाहौर सेक्टर में बहादुरी से मोर्चा संभाला।
इसके बाद उन्होंने 66वीं आर्मर्ड रेजिमेंट तथा उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में एक माउंटेन ब्रिगेड की सफल कमान संभाली। उनकी उत्कृष्ट सैन्य सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) सहित कई सम्मान प्राप्त हुए।
सेना की सर्वोच्च जिम्मेदारी तक पहुंचे
1 जून 1987 को उन्होंने पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) का दायित्व संभाला। इसके कुछ ही समय बाद उन्हें राष्ट्रपति का मानद एडीसी (Aide-de-Camp) नियुक्त किया गया। 1 मई 1988 को उन्होंने भारतीय सेना के थल सेनाध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया और लगभग दो वर्षों तक सेना का नेतृत्व किया। 30 जून 1990 को वे सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए।
देश हमेशा याद रखेगा योगदान
जनरल वी. एन. शर्मा का निधन केवल एक सैन्य अधिकारी का निधन नहीं, बल्कि भारतीय सेना के एक ऐसे युग का अंत है जिसने अनुशासन, साहस और राष्ट्रसेवा की नई मिसाल कायम की। हिमाचल प्रदेश का यह वीर सपूत अपनी कर्तव्यनिष्ठा, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति समर्पण के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
उनके निधन से भारतीय सेना, हिमाचल प्रदेश और पूरे देश ने एक महान सैनिक, कुशल रणनीतिकार और प्रेरणादायी व्यक्तित्व को खो दिया है। उनकी सेवाएं और राष्ट्र के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

