चार माह से मानदेय का इंतजार, आर्थिक संकट में कोटी के जल रक्षक; सरकार से जल्द भुगतान की मांग

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हिमख़बर डेस्क 

जल शक्ति विभाग के उपमंडल कोटी के अंतर्गत कार्यरत करीब 25 जल रक्षक पिछले चार माह से मानदेय न मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

महज 5,600 रुपये प्रतिमाह मानदेय पर कार्य करने वाले इन जल रक्षकों का कहना है कि लगातार भुगतान लंबित रहने से परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों को पूरा करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

जानकारी के अनुसार, पंचायतों के माध्यम से नियुक्त ये जल रक्षक ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल योजनाओं के संचालन, रखरखाव और नियमित निगरानी की जिम्मेदारी निभाते हैं।

विभाग की ओर से उनकी ड्यूटी प्रतिदिन चार घंटे निर्धारित की गई है, लेकिन पेयजल आपूर्ति निर्बाध बनाए रखने के लिए उन्हें कई बार पूरे दिन कार्य करना पड़ता है।

पाइपलाइन में खराबी, जल स्रोतों की निगरानी और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू रखने जैसे कार्यों के चलते उनकी जिम्मेदारियां निर्धारित समय से कहीं अधिक बढ़ जाती हैं।

इसके बावजूद पिछले चार माह से मानदेय का भुगतान न होने से उनके सामने आर्थिक परेशानियां लगातार गहराती जा रही हैं।

इस संबंध में जल शक्ति विभाग उपमंडल कोटी के सहायक अभियंता विवेक शर्मा ने बताया कि विभाग के पास फिलहाल बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण मानदेय जारी नहीं किया जा सका है। उन्होंने कहा कि जैसे ही बजट प्राप्त होगा, सभी जल रक्षकों का लंबित मानदेय एक साथ जारी कर दिया जाएगा।

वहीं जिला परिषद सदस्य खुश विक्रम सेन ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अंशकालिक कर्मचारियों को समय पर मानदेय न मिलना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने सरकार से चार माह से लंबित भुगतान अविलंब जारी करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि जल रक्षक ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं और विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं।

ऐसे कर्मचारियों के हितों की अनदेखी न केवल उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ाती है, बल्कि पेयजल व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

सरकार को इस विषय पर संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द से जल्द लंबित मानदेय जारी करना चाहिए।

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