हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहुल-स्पीति की स्पीति घाटी के छरमा यानी सीबकथॉर्न को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिल गया है। जीआई टैग मिलने से अब स्पीति के छरमा और इससे बने उत्पादों को नई पहचान मिलेगी। इससे आमजन, विशेषकर महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इससे पहले लाहुल में बने दस्ताने और जुराबों को भी जीआई टैग मिल चुका है।
सीबकथॉर्न के फल से लेकर पत्तियों और जड़ का इस्तेमाल दवाओं से लेकर सप्लीमेंट समेत अन्य उत्पादों में किया जाता है। इसके अलावा जूस, जैम, बिस्किट से लेकर ग्रीन टी जैसे कई प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं।
इस पौधे का हर भाग औषधीय गुणों से भरपूर है। यह पौधा माइनस डिग्री तापमान पर भी जीवित रह सकता है। माइनस 40 से 45 डिग्री तापमान में भी फलने-फूलने की इसकी खासियत इसे लाहुल-स्पीति के लोगों के लिए आय का बड़ा जरिया बनाती है।
औषधीय गुणों से भरपूर है छरमा
सीबकथॉर्न या छरमा एक फलदार पौधा है, जिसका फल (बेरी), फूल, पत्तियां, तना और जड़ भी काफी फायदेमंद माना जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार औषधीय गुणों से भरपूर इसके फल में ओमेगा-7 फैटी एसिड पाया जाता है।
इसकी पत्तियों में ओमेगा फैटी एसिड 3, 6, 7 और 9 पाए जाते हैं। यह पौधा एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन सी-ई के साथ-साथ अमीनो एसिड समेत कई तत्वों से भरपूर है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
यह भी होता है फायदा
आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार सीबकथॉर्न का फल पोषक तत्वों से भरपूर है, जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। सीबकथॉर्न से बने उत्पाद पेट से जुड़ी बीमारी से लेकर पाचन और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बहुत ही कारगर साबित होते हैं।

