चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के भरोसे चल रही पीरन आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी, ग्रामीणों ने रिक्त पद भरने की उठाई मांग

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हिमखबर डेस्क

शिमला जिले की पीरन पंचायत में वर्ष 1962 से संचालित आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी स्टाफ की भारी कमी के कारण बदहाल स्थिति में पहुंच गई है। हालत यह है कि वर्तमान में पूरी डिस्पेंसरी का संचालन केवल एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के भरोसे चल रहा है।

लंबे समय से चिकित्सक और फार्मासिस्ट के पद रिक्त होने से स्थानीय लोगों को समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार से रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि डिस्पेंसरी बंद हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

जानकारी के अनुसार करीब दो वर्ष पहले यहां कार्यरत आयुर्वेदिक चिकित्सक का तबादला बिलासपुर कर दिया गया था, जिसके बाद से चिकित्सक का पद खाली पड़ा है। वहीं फार्मासिस्ट का पद पिछले तीन वर्षों से रिक्त है, जबकि प्रशिक्षित दाई (टीबीए) का पद करीब 30 वर्षों से नहीं भरा गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि एक समय ऐसा था जब 1970 के दशक में इस डिस्पेंसरी में चिकित्सक सहित चार कर्मचारी कार्यरत रहते थे और क्षेत्र के लोगों को नियमित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होती थीं।

ग्रामीणों का कहना है कि राज्य सरकार बिना स्टाफ वाले आयुर्वेदिक संस्थानों को बंद करने की प्रक्रिया पर काम कर रही है। ऐसे में पीरन पंचायत के लोगों को आशंका है कि स्टाफ की लगातार कमी के कारण उनकी डिस्पेंसरी भी बंद की जा सकती है, जिससे हजारों लोगों की स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित होंगी।

पहले इस आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी में पीरन पंचायत के अलावा सतलाई, बलोग तथा सिरमौर जिले की सीमा से सटी कोटला बांगी पंचायत के लोग भी उपचार के लिए पहुंचते थे। वर्तमान में भी यहां हर माह औसतन करीब 250 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए आते हैं। डिस्पेंसरी में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कमल वर्मा सीमित संसाधनों के बीच संस्थान का संचालन कर रहे हैं।

पीरन पंचायत के पूर्व प्रधान दयाराम वर्मा, दौलत राम मेहता, पूर्व प्रधान कमलेश ठाकुर, प्रीतम सिंह ठाकुर, प्रेमदास शर्मा, रामगोपाल मेहता सहित अन्य ग्रामीणों ने सरकार से चिकित्सक और फार्मासिस्ट के रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते नियुक्तियां नहीं की गईं और डिस्पेंसरी बंद हुई तो क्षेत्र के लोगों को इलाज के लिए दूरदराज के अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा।

जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. अश्वीन शर्मा के बोल

उधर, जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. अश्वीन शर्मा ने बताया कि चिकित्सक के रिक्त पद का मामला उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार शीघ्र आवश्यक कदम उठाकर रिक्त पदों को भरेगी, जिससे क्षेत्र के लोगों को फिर से बेहतर आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।

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