हिमखबर डेस्क
होर्मुज जलमार्ग में ओमान तट पर हुए अमेरिकी मिसाइल हमले में जान गंवाने वाले हमीरपुर जिले के भालू गांव के आदित्य शर्मा की मौत को लेकर परिजनों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। शोक में डूबे परिवार ने केंद्र सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि यह पता चल सके कि आखिर किसकी गलती के कारण उनके पोते की जान गई।
दादा अशोक ने उठाए सवाल
आंखों में आंसू लिए दादा अशोक ने कहा कि शिप को पहले ही खतरे की चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद जहाज को आगे क्यों बढ़ाया गया, इसकी गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि चेतावनी के बाद उचित कदम उठाए जाते तो शायद आज उनका पोता जीवित होता। यह सवाल जहाज के प्रबंधन और सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
पिता का दावा: खतरे का था अलर्ट, गंभीरता से नहीं लिया गया
आदित्य के पिता राजेश कुमार शर्मा ने दावा किया कि आदित्य ने रविवार को फोन पर बताया था कि उनका शिप डेंजर जोन में है। उन्होंने यह भी बताया कि सेना के हेलीकॉप्टर द्वारा दो बार जहाज को वहां से हटाने और आगे न बढ़ने की चेतावनी दी गई थी, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। पिता ने इस हमले को युद्ध अपराध बताया है और इस बात पर जोर दिया कि जहाज एक कमर्शियल टैंकर था और उस पर मौजूद सभी लोग निहत्थे थे।
चाचा ने इंजन रूम में आदित्य की उपस्थिति पर उठाए सवाल
चाचा संजीव लखनपाल ने भी कई सवाल उठाते हुए कहा कि हमले के समय रात करीब साढ़े दस बजे आदित्य को इंजन रूम के पास कौन सा कार्य सौंपा गया था। उन्होंने इस बात की भी गहन जांच की मांग की है।
पार्थिव देह को जल्द भारत लाने और जांच की मांग
परिजनों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और सांसद अनुराग ठाकुर से आदित्य के पार्थिव देह को जल्द भारत लाने और मामले की जांच करवाने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि चेतावनियों के बावजूद जहाज को खतरे वाले क्षेत्र में ले जाने और सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए।

