हिमखबर डेस्क
पंचायती राज चुनावों के पहले चरण के मतदान से पूर्व शिक्षा विभाग और चुनाव आयोग के सामने एक बड़ा प्रशासनिक और संवेदनशील सवाल खड़ा हो गया है। कई ऐसे प्राथमिक विद्यालय हैं जहां केवल एक ही शिक्षक कार्यरत है, जबकि उसका मतदाता पंजीकरण किसी दूसरी पंचायत में है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि वह शिक्षक अपना मतदान अधिकार कैसे प्रयोग करेगा और उसकी अनुपस्थिति में विद्यालय की जिम्मेदारी कौन संभालेगा।
जानकारी के अनुसार कई शिक्षकों की ड्यूटी ऐसी पंचायतों में है जहां मतदान 28 मई 2026 को होना है, जबकि उनका गृह पंचायत क्षेत्र पहले चरण यानी 26 मई को मतदान कर रहा है। ऐसे अध्यापक यदि अपने गृह क्षेत्र में वोट डालने जाते हैं तो विद्यालय में विद्यार्थियों की देखरेख कौन करेगा, इसे लेकर भारी असमंजस बना हुआ है।
शिक्षकों का कहना है कि स्पेशल कैजुअल लीव तभी व्यवहारिक मानी जा सकती है जब विद्यालय में कोई जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद हो। लेकिन कई स्कूलों में अकेले शिक्षक ही तैनात हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या विद्यालय उस दिन बंद रहेगा, या फिर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अथवा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को विद्यार्थियों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
बताया जा रहा है कि शिक्षा खंड संगड़ाह में कुछ विद्यालयों के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को अस्थायी रूप से विद्यार्थियों की देखरेख के आदेश जारी किए गए हैं। हालांकि अन्य शिक्षा खंडों में अभी तक इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी नहीं हुए हैं। इसी कारण शिक्षकों और कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
शिक्षकों ने मांग की है कि शिक्षा विभाग तथा चुनाव आयोग तत्काल स्पष्ट दिशा-निर्देश जारीकरें, ताकि मतदान के अधिकार और विद्यालय संचालन दोनों प्रभावित न हों। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्थिति स्पष्ट नहीं हुई तो कई अकेले शिक्षक अपने मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित रह सकते हैं।
शिक्षकों ने यह भी आग्रह किया है कि जिन विद्यालयों में केवल एक शिक्षक कार्यरत है, वहां मतदान दिवस पर वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि न तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो और न ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी कर्मचारी का अधिकार बाधित हो।

