आंख में 10 दिन तक फंसी रही लकड़ी, IGMC के डॉक्टरों ने ऐसे बचाई 5 साल की मासूम की जान!

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हिमखबर डेस्क

हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल IGMC शिमला के डॉक्टरों के अनुभव और सूझबूझ ने एक 5 वर्षीय बच्ची की आंखों में दोबारा उजाला भर दिया। खेलते समय बच्ची की आंख में लकड़ी का एक नुकीला टुकड़ा गहराई तक फंस गया था, लेकिन डॉक्टरों ने समय रहते बेहद मुश्किल सर्जरी कर उसे सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया और बच्ची की आंख की रोशनी बचा ली।

दरअसल, सिरमौर जिले की रहने वाली यह बच्ची खेलते समय हादसे का शिकार हो गई थी। गिरने के दौरान लकड़ी का नुकीला टुकड़ा उसकी आंख के अंदर जा फंसा। शुरुआत में परिजनों को चोट मामूली लगी, लेकिन धीरे-धीरे आंख में सूजन और दर्द बढ़ने लगा। हालत बिगड़ने पर परिजन बच्ची को लेकर तुरंत IGMC शिमला पहुंचे।

अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्ची का CT स्कैन और MRI करवाया। हैरानी की बात यह रही कि किसी भी स्कैन में आंख के अंदर फंसी लकड़ी साफ दिखाई नहीं दी। रिपोर्ट में केवल सूजन और चोट के निशान नजर आए। इसके बावजूद डॉक्टरों को शक था कि आंख के अंदर कोई बाहरी चीज फंसी हुई है।

नेत्र विभाग के एचओडी (हेड ऑफ डिपार्टमेंट) डॉ. रामलाल शर्मा ने बच्ची की हालत को गंभीरता से लिया। उन्होंने केवल रिपोर्ट पर भरोसा करने के बजाय अपने अनुभव और लक्षणों के आधार पर ऑपरेशन करने का फैसला लिया। डॉक्टरों का मानना था कि अगर इलाज में देरी हुई तो बच्ची की आंख की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती थी।

इसके बाद नेत्र विभाग और डेंटल विभाग के डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन शुरू किया। करीब दो घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी में डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आंख की नसों और अंदरूनी हिस्सों को सुरक्षित रखना था। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने बेहद सावधानी के साथ आंख के अंदर फंसा लकड़ी का टुकड़ा बाहर निकाला।

डॉक्टरों के अनुसार, लकड़ी का टुकड़ा करीब 10 दिनों तक बच्ची की आंख में फंसा रहा. लंबे समय तक लकड़ी अंदर रहने से संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया था। अगर थोड़ी और देरी होती तो बच्ची की आंख की रोशनी जा सकती थी लेकिन समय पर ऑपरेशन होने से उसकी आंख सुरक्षित बच गई।

इस सफल ऑपरेशन में डॉ. रामलाल शर्मा के साथ डॉ. आरती और डॉ. कल्पना ने अहम भूमिका निभाई। वहीं डेंटल विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने भी सर्जरी के दौरान पूरा सहयोग दिया। डॉक्टरों की टीमवर्क और अनुभव की वजह से यह मुश्किल ऑपरेशन सफल हो पाया।

ऑपरेशन के बाद बच्ची की हालत में लगातार सुधार देखा गया। डॉक्टरों ने उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी है, हालांकि आगे जांच और नियमित चेकअप के लिए बुलाया गया है। फिलहाल बच्ची की आंख की रोशनी सुरक्षित है और वह तेजी से स्वस्थ हो रही है।

इस सफल सर्जरी के बाद IGMC के डॉक्टरों की हर तरफ सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि डॉक्टरों की सूझबूझ, अनुभव और मेहनत की वजह से एक मासूम बच्ची की जिंदगी और भविष्य दोनों सुरक्षित हो पाए हैं।

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