हिमखबर डेस्क
कांगड़ा के धरोहर गांव गरली स्थित सिविल अस्पताल में रात्रि स्वास्थ्य सेवाओं की पोल उस समय खुल गई, जब सडक़ हादसे में घायल एक युवक को समय पर एंबुलेंस और उचित उपचार न मिलने का आरोप सामने आया।
पीडि़त परिवार ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दी, जिसके बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर बहस छिड़ गई है।
जानकारी के अनुसार गुरुवार देर शाम चंबापत्तन पुल के पास एक युवक की बाइक अचानक स्किड हो गई और वह सडक़ किनारे ढांक से नीचे जा गिरा। हादसे में युवक के सिर और नाक पर गंभीर चोटें आईं।
परिजन उसे तुरंत उपचार के लिए गरली सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन आरोप है कि वहां रात के समय न तो पर्याप्त स्टाफ मिला और न ही एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध करवाई गई।
घायल युवक के पिता रमेश कुमार निवासी भरवाई ने बताया कि उन्होंने अस्पताल कर्मचारियों से कई बार एंबुलेंस उपलब्ध करवाने और मरीज को बड़े अस्पताल रैफर करने की मांग की, लेकिन उनकी बात को अनसुना कर दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल के एक कर्मचारी ने परिजनों के साथ बदसलूकी भी की। पीडि़त परिवार ने पूरे घटनाक्रम की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई।
वीडियो में परिजन अस्पताल की लचर व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर करते हुए सरकार से सवाल करते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि गरली अस्पताल केवल नाम का अस्पताल बनकर रह गया है और रात के समय यहां मरीजों को भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है।
परिजनों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग की है कि अस्पताल में रात्रि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए और पर्याप्त स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
क्या कहते हैं BMO
मामले में जब डाडासिबा के बीएमओ सतीश फोतेदार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मामला उनके ध्यान में आया है और घायल मरीज को उपचार दिया गया था। उन्होंने माना कि अस्पताल में स्टाफ की कमी है, जिसके कारण कभी-कभी दिक्कत आ सकती है।

