हिमखबर डेस्क
मंडी जनपद के आराध्य देव कमरूनाग शिवरात्रि महोत्सव के बाद अपने भक्तों के घरों पर जाकर उन्हें मेहमाननवाज़ी का अवसर दे रहे हैं। भक्तों के पास वर्ष में सिर्फ यही एक अवसर होता है, जब वे अपने आराध्य देव को अपने घर पर आमंत्रित कर पाते हैं।
क्यों खास है लोगों के लिए देव कमरुनाग का आतिथ्य, देखिए इस रिपोर्ट में।
देव कमरूनाग, जिनका नाम और वाद्य यंत्रों की धुन सुनते ही मंडी जनपद के लोग भाव-विभोर हो उठते हैं। देव कमरूनाग का मूल स्थान कमरूनाग झील के तट पर है, जबकि उनका भंडार कमरूघाटी के गोत गांव में है।
देव कमरुनाग का सूरजपाखा (छड़ी) वर्ष में सिर्फ एक बार शिवरात्रि महोत्सव में शामिल होने के लिए मंडी आता है। शिवरात्रि में शामिल होने से पहले और उसके बाद देव कमरुनाग अपने भक्तों के घरों पर जाकर उन्हें मेहमाननवाज़ी का अवसर देते हैं।
देव कमरूनाग के साथ चल रहे उनके पूर्व गुर नीलमणि ने बताया कि 6 फरवरी को देव कमरुनाग अपने भंडार से मंडी के लिए रवाना हुए थे। अभी तक वे 120 से अधिक घरों में जाकर अपने भक्तों को आशीर्वाद और मेहमाननवाज़ी का अवसर दे चुके हैं, जबकि आने वाले दिनों में भी उतनी ही संख्या में भक्तों ने निमंत्रण दे रखे हैं। रोज़ाना देव कमरूनाग अधिकतम 5 घरों पर जाते हैं।
भक्तों में देव कमरूनाग के उनके घर आगमन को लेकर खासा उत्साह रहता है। देवभूमि ग्रुप के मालिक राजेंद्र वशिष्टा और उनकी पत्नी मोनिका वशिष्टा ने बताया कि जब से उन्होंने मंडी में अपने कारोबार की शुरुआत की है, तभी से वे देव कमरूनाग को आमंत्रित करते आ रहे हैं।
वर्ष में सिर्फ यही एक अवसर होता है जब उन्हें देव कमरूनाग की मेहमाननवाज़ी का सौभाग्य मिलता है, और बीते 12 वर्षों से उन्हें यह सौभाग्य लगातार प्राप्त हो रहा है।
बताया जाता है कि आने वाली संक्रांति, यानी 14 मार्च तक देव कमरूनाग की यह यात्रा पूर्ण हो जाएगी और वे वापस अपने भंडार में प्रवेश करेंगे।
खास बात यह भी है कि देव कमरूनाग की यह यात्रा पूरी तरह पैदल ही होती है; वे कभी किसी वाहन पर सवार होकर नहीं जाते।

