मार्क्स और लेनिन के विचारों में ही खूनी हिंसा शामिल तो एस.एफ.आई से क्या उम्मीद करें : नैंसी अटल

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एस.एफ.आई जिनको मानती है अपना आदर्श उनके विचारों में खूनी क्रांति शामिल, एच.पी.यू में एकतरफा कार्यवाही कर रहा पुलिस प्रशाशन एस.एफ.आई के गुंडे खुले घूम रहे : नैंसी अटल

शिमला – नितिश पठानियां

वीरवार, 13 मार्च 2025 के दिन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा पुलिस प्रशाशन को एच.पी.यू में विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के ऊपर हो रही एकतरफा कार्यवाही को लेकर ज्ञापन सौंपा गया।

बता दें कि पिछले कुछ दिनों में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अंदर एस.एफ.आई के गुंडों द्वारा तेजतर्रा हथियारों के साथ अभाविप के कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया, तब से हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। विद्यार्थी परिषद की प्रदेश मंत्री कुमारी नैंसी अटल ने बताया कि इस घटनाक्रम में पुलिस प्रशाशन लगातार एकतरफा कार्यवाही कर रहा है और एस.एफ.आई के गुंडे खुलेआम घूम रहे हैं।

नैंसी अटल ने कहा कि “हैरानी का विषय तो यह है कि हिंसा की शुरुआत करने वाली एस.एफ.आई ने हिंसा करने के तुरंत बाद मीडिया का सहारा लेकर जनता के बीच संवेदनाएं जुटाने का प्रयास किया। इस से यह स्पष्ट होता है कि एस.एफ.आई ने हमले की पूर्व योजना बनाई हुई थी।

एस.एफ.आई और अभाविप के आपस में विचारधारा को लेकर सदैव से मतभेद रहे हैं। एक और अभाविप स्वामी विवेकानंद जी के विचारों की बात करती है तो दूसरी ओर एस.एफ.आई मार्क्स, लेनिन, स्टालिन और माओवादी विचारकों को अपना आर्दश मानती आई है।

जिस मार्क्स को एस.एफ.आई अपना आदर्श मानती है उसने अपने विचारों में स्पष्ट रूप में लिखा है कि क्रांति खून के बिना नहीं लाई जा सकती। ऐसे में हिंसक विचारधारा किस छात्र संगठन की है यह हिमाचल प्रदेश की जनता भलि भांति जानती है।

दूसरी और विद्यार्थी परिषद स्वामी विवेकानंद को अपना आर्दश मानते हुए राष्ट्र हित में वर्ष 1949 से ही कार्यरत है। विश्वविद्यालय के अंदर जब भी तनावपूर्ण स्थिति पैदा हुई है इसका कारण एस.एफ.आई ही रही है। आज जहां एक तरफ कुछ गिने चुने राज्यों को छोड़कर देश ने मार्क्स के विचारों को नकार दिया है।

वहीं एस.एफ.आई कुछ परिसरों में अपनी अंतिम सांसे गिनते हुए हिंसा का सहारा लेकर जीवंत है। इसका जीता जागता उदाहरण हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय है जहां एस.एफ.आई अपने हिंसक रुख को बरक़रार रखे हुए है और विद्यार्थी परिषद की छवि को प्रदेश में धूमिल करने का कार्य करती है।

एस.एफ.आई जैसे छात्र संगठन का कोई उद्देश्य नहीं है, इनका केवलमात्र उद्देश्य राष्ट्र के पुनः निर्माण में कार्यरत छात्र संगठनों को हिंसा के जरिए परेशान करना है। हिमाचल प्रदेश में जहां जहां एस.एफ.आई है हिंसा केवल उन्हीं परिसरों में देखी जा सकती है।”

नैंसी अटल ने पुलिस प्रशाशन से अपील करी है कि एकतरफा कार्यवाही ना करते हुए पुलिस प्रशाशन एस.एफ.आई के गुंडों पर भी सख्त से सख्त कार्यवाही करे व एस.एफ.आई जैसे हिंसक छात्र संगठन पर नकेल कसने का कार्य करे।

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