तहसीलदार ‘ऋषभ’ ने 30 दिन में निपटाया 40 साल पुराना विवाद, हाईकोर्ट से शाबाशी

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तहसीलदार ‘ऋषभ’ ने 30 दिन में निपटाया 40 साल पुराना विवाद, हाईकोर्ट से शाबाशी

सिरमौर – नरेश कुमार राधे

हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब के युवा तहसीलदार ऋषभ शर्मा ने एक खास रिकॉर्ड अपने नाम किया है। इस रिकॉर्ड पर उच्च न्यायालय ने भी मुहर लगाई है। दरअसल, पिपलीवाला पंचायत में परिवार के बीच जमीन की तकसीम का विवाद लगभग 40 साल से चल रहा था।

इसी बीच तहसीलदार ऋषभ शर्मा को माननीय उच्च न्यायालय से इस विवाद को तय अवधि में निपटाने के आदेश दिए गए। हालांकि, आदेश में समय सीमा तय नहीं की गई थी, लेकिन युवा अधिकारी ने विवाद को 30 दिन के भीतर ही निपटाने का लक्ष्य निर्धारित कर लिया। इसमें सफलता मिली तो इस बारे माननीय उच्च न्यायालय को अवगत करवा दिया गया।

6 अगस्त को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा युवा तहसीलदार को प्रशंसा पत्र दिया गया, साथ ही उपायुक्त को ये भी आदेश दिए गए कि तहसीलदार ऋषभ शर्मा के इस कार्य का जिक्र उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में इंगित किया जाए। बता दें कि हरेक अधिकारी व कर्मचारी की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) समूचे कैरियर में बेहद मायने रखती है।

तहसीलदार स्तर के अधिकारी की एसीआर (ACR) एसडीएम या डीसी द्वारा लिखी जाती है। लेकिन इस मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने उपायुक्त को एसीआर में इस कार्य का जिक्र करने के निर्देश दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि 40 साल की मियाद काफी लंबी होती है। लाजमी तौर पर आपके जहन में एक सवाल ये भी उठ रहा होगा कि युवा राजस्व अधिकारी ने ऐसा क्या कर दिया, जो 40 साल का विवाद 30 दिन में ही सुलझ गया।

मिली जानकारी के मुताबिक युवा अधिकारी ने जमीन के तमाम हिस्सेदारों की बारीकी से काउंसलिंग की। साथ ही ये भी समझाने का प्रयास किया कि संसार से कोई भी व्यक्ति धन दौलत या जमीन साथ लेकर नहीं जाता है।

इस दौरान अधिकारी को चुनौती का भी सामना करना पड़ा, क्योंकि एक हिस्सेदार द्वारा यमुना में कूदने की बात भी कही जा रही थी। कुल मिलाकर तमाम हिस्सेदारों की रजामंदी से तहसीलदार ने तकसीम के आदेश जारी कर दिए।

उधर, तहसीलदार ऋषभ शर्मा ने कहा कि विवाद को निपटाने में अनुभव भी मिला, साथ ही प्रशंसा मिलने से हौसला अफजाई हुई है।

हिमाचल में ऐसा पहले हुआ है, इस बात के सवाल पर ऋषभ शर्मा ने कहा कि वो एक तहसीलदार स्तर के अधिकारी को जानते हैं, जिन्होंने काफी कम अवधि में लंबा विवाद निपटाया था। संभव है कि ऐसा अन्य राजस्व अधिकारियों ने भी किया होगा।

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