मंडी सिया हत्याकांड: आठ दिन, तीन बयान, नतीजा एक – मां से नाराज विकास ने सिया पर उतारा गुस्सा; लेकिन?

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हिमखबर डेस्क

आठ दिन की जांच में तीन अलग-अलग बयान सामने आने के बावजूद सिया हत्याकांड में पुलिस एक ही आरोपी विकास पटियाल की भूमिका मानकर आगे बढ़ रही है। मां से पैसों को लेकर हुए विवाद के बाद गुस्से में हत्या की थ्योरी फिलहाल जांच का आधार बनी हुई है, जबकि मृतका और आरोपी के परिजन साजिश की आशंका जता चुके हैं।

सरकाघाट में हुए सिया हत्याकांड की जांच आठवें दिन भी कई सवालों के बीच आगे बढ़ रही है। पुलिस ने अब तक की जांच में किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका से इनकार किया है और एक ही आरोपी को जिम्मेदार मानते हुए केस को उसी दिशा में आगे बढ़ाया है।

हालांकि, पूछताछ के दौरान आरोपी के बदलते बयान इस मामले को जटिल बना रहे हैं। शुरुआत में आरोपी ने सनक में हत्या की बात कही, इसके बाद किसी लड़की की शिकायत का शक सामने आया, जबकि बाद में मां से पैसे न मिलने पर हुए विवाद के बाद गुस्से में वारदात को अंजाम देने की बात सामने आई।

पुलिस फिलहाल इसी आखिरी थ्योरी को आधार मानते हुए सबूत जुटाने में लगी है। जांच के मुताबिक घटना वाले दिन आरोपी की अपनी मां से पैसों को लेकर कहासुनी हुई थी। इसके बाद वह घर से निकला और अलग-अलग स्थानों से होते हुए नैण गांव की ओर पहुंचा।

रास्ते में बैंजी गांव के पास उसने सिया को अकेला देखा और उस पर दराट से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी मौके से भागते हुए मंदिर और नाले के रास्ते नघला नाला तक पहुंचा, जहां ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया।

पुलिस के अनुसार विभिन्न स्थानों से जुटाए गए सीसीटीवी फुटेज में आरोपी की मूवमेंट अकेले ही पाई गई है, जिससे जांच में फिलहाल किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने नहीं आई है। हालांकि, जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि आरोपी रास्ते में एक अन्य व्यक्ति से मिला था, लेकिन उसने उस पर हमला नहीं किया।

पुलिस इसे परिस्थितिजन्य निर्णय मानते हुए छात्रा को सॉफ्ट टारगेट मानकर हमला किए जाने की बात कह रही है। इधर, मृतका और आरोपी दोनों के परिजन शुरू से ही इस घटना में साजिश की आशंका जता रहे हैं। ऐसे में जांच की दिशा को लेकर सवाल बने हुए हैं, जिनका जवाब आगे की फॉरेंसिक रिपोर्ट और विस्तृत जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा।

कब-कब क्या हुआ

  • 13 अप्रैल : सुबह करीब 9:15 बजे आरोपी ने कॉलेज छात्रा सिया पर दराट से हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। दोपहर को ही आरोपी को स्थानीय ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत कर नघला नाला से दबोचा। देर शाम मौहीं में लोगों ने चक्का जाम कर दिया।
  • 14 अप्रैल : मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेजा। आरोपी को उपचार के लिए नेरचौक मेडिकल कॉलेज में रखा गया।
  • 15 अप्रैल : अदालत ने 20 अप्रैल तक पांच दिन के पुलिस रिमांड पर आरोपी को भेजा। पूछताछ में आरोपी ने किसी लड़की के शिकायत करने के शक की बात बताई।
  • 16 अप्रैल : पूछताछ में आरोपी अपने किए पर पछतावा करता रहा।
  • 17 अप्रैल : पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गर्दन की हड्डी कटना व रक्त स्राव बताया गया।
  • 18 अप्रैल : निशानदेही प्रक्रिया पूरी करवाई गई। इसी दिन पुलिस पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि मां ने उसे बीड़ी खरीदने के लिए पैसे नहीं दिए थे। मां से कहासुनी के बाद वह घर से निकला था। घर से ही वह किसी की हत्या करने के इरादे से निकला। सिया को अकेली पाकर उसने हमला किया।
  • 19 अप्रैल : रिमांड अवधि पूरी होने से पहले पुलिस ने आरोपी से पूछताछ कर उससे जुड़ी सभी तरह की जांच पूरी होना सुनिश्चित किया।
  • 20 अप्रैल : पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया। आरोपी से जुड़ी जांच पूरी होने पर अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अब आरोपी सब जेल मंडी में है।

आरोपी के कपड़े और दराट में सिया के खून का हुआ मिलान

आरोपी विकास पटियाल के कपड़ों, हत्या में इस्तेमाल दराट, घटना स्थल पर पड़े खून के सैंपल सिया के खून से मैच हुए हैं। टीम ने मौके पर बाड़ से भी खून का सैंपल लिया था। डीएनए रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। इस मामले में यह रिपोर्ट अहम कड़ी मानी जा रही है।

इस मामले में यह भी सामने आया है कि आरोपी मां का फोन रील देखने के लिए इस्तेमाल करता है। फोटोग्राफी विश्लेषण की रिपोर्ट आना बाकी है। इसमें सीसीटीवी फुटेज में आरोपी के ही होने बारे पुख्ता किया जाएगा। मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

विनोद कुमार, एसपी मंडी के बोल

इस मामले में आरोपी के गुस्से में आकर ही हत्या करने के तथ्य सामने आए हैं। पुलिस ने शिद्दत के साथ कार्य किया है। पुलिस जांच जारी है। बारीकी से इस पूरे मामले में नजर रखी जा रही है।

आरएम शर्मा, सेवानिवृत्त डीआईजी के बोल

स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इस तरह के लोगों पर नजर रखनी चाहिए। कम्युनिटी पुलिसिंग भी की जानी चाहिए। खाकी वर्दी की मौजूदगी समाज में असामाजिक तत्वों को डर पैदा कर सकती है। अब घटना घट चुकी है। ऐसे में अब कानूनन नियमानुसार कार्रवाई होगी।

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