मत वहन करो

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हिमखबर – डेस्क

मत वहन करो मेरे विचार को, मुझे भी नहीं चाहिए
तुमसे अलंकार के भूषण।

मत वहन करो मेरी वाणी को, मुझे भी नहीं चाहिए
तुमसे छंदों के बंधन।

मत वहन करो मेरे अंतर्द्वंद को, मुझे भी नहीं चाहिए
तुमसे परिछंदों के द्वंद।

मत वहन करो मेरे अंत:वेगों को, मुझे भी नहीं चाहिए
तुमसे रागों की रागनी।

मत वहन करो, मेरे हृदय तल की असवादों को
मुझे भी नहीं चाहिए, तुम्हारे रसों से उत्पन्न रसायन।

मौलिकता प्रमाण पत्र

मेरे द्वारा भेजी रचना मौलिक तथा स्वयं रचित जो कहीं से भी कॉपी पेस्ट नहीं है।

राजीव डोगरा (भाषा अध्यापक) राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, गाहलिया
पता – गांव जनयानकड़, पिन कोड -176038, कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
9876777233 – rajivdogra1@gmail.com

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