हिमाचल में 25 फीसदी से कम रिजल्ट देने वाले शिक्षकों को नोटिस जारी, न बढ़ेगी सैलरी, मांगा जाएगा स्पष्टीकरण

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हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों को नोटिस जारी किए जाएंगे, ये नोटिस उन स्कूलों को जारी किए जाएंगे जहां के परिणाम 25 फीसदी से कम हैं, प्रदेश में 30 स्कूलों में परिणाम शून्य प्रतिशत था

शिमला – नितिश पठानियां

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से जुड़े उन स्कूलों में जहां दसवीं कक्षा के बोर्ड नतीजों में 25 फीसदी से नीचे छात्र पास हैं। उन विद्यालयों को कारण बताओं नोटिस जारी किया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा ये नोटिस जारी किए जाएंगे। इन नोटिस में शिक्षकों से ‘खराब नतीजों’ को लेकर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध स्कूलों के कक्षा दसवीं के बोर्ड नतीजों के विश्लेषण से पता चला है कि 116 स्कूलों में परिणाम 25 प्रतिशत से कम था, जिनमें से 30 स्कूलों में परिणाम शून्य प्रतिशत था, यह जानकारी प्राथमिक शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने दी।

उन्होंने बताया कि शिक्षकों की पहचान कर ली गई है और नोटिस भेजने की प्रक्रिया मंगलवार यानी आज से शुरू हो जाएगी। आशीष ने कहा कि इसमें चेतावनी जारी करने और वेतन वृद्धि रोकने का प्रावधान है और पहले चरण में शिक्षा निदेशालय और उप निदेशक उन स्कूलों के शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांग रहे हैं, जहां उत्तीर्ण प्रतिशत 25 प्रतिशत से कम है।

उन्होंने कहा कि किसी विशेष स्कूल में शिक्षक के कार्यकाल और स्टाफ की कमी पर विचार किया जाएगा, लेकिन यदि किसी शिक्षक ने किसी विशेष स्कूल में नौ महीने का कार्यकाल बिताया है, तो उन्हें खराब परिणाम के पीछे का कारण बताना होगा।

कोहली ने कहा कि 1,122 जूनियर बेसिक ट्रेनिंग (जेबीटी) और 1,027 प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) की बैच-वार भर्ती जल्द ही की जाएगी और हम नए भर्ती किए गए लोगों को पाठ्यक्रम से परिचित कराने के लिए विभिन्न जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में उनके लिए 15 दिवसीय प्रेरण प्रशिक्षण आयोजित करने की योजना बना रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह देखा गया है कि बैच-वार भर्ती किए गए अधिकांश शिक्षक अन्यत्र काम कर रहे हैं और नियमित रूप से पढ़ा नहीं रहे हैं और पढ़ाई से उनका जुड़ाव खत्म हो गया है और इसलिए शिक्षा मंत्री ने उन्हें प्रेरण प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया है।

हालांकि, अधिकारी ने कहा कि शिक्षकों की कमी, उचित निगरानी का अभाव और कक्षा 8 तक हर छात्र को प्रमोट करने का प्रावधान खराब नतीजों के पीछे कुछ कारण हैं।

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