हिमखबर डेस्क
वन अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ वन वृत्त मंडी के अध्यक्ष श्री छोटू यादव ने प्रेस नोट जारी करते हुए प्रतिक्रिया दी है कि आज राज्य सरकार की कैबिनेट बैठक के द्वारा जो वन विभाग में सहायक वनरक्षक की 500 पदों हेतु कैबिनेट से मंजूरी मिली हैं।
जिसका महासंघ पूर्ण रूप से विरोध करता हैं क्योंकि वन विभाग में पहले से ही वनरक्षक के 650 पद खाली चले हुए हैं सरकार जिन्हें भरने के बजाय एक नया प्रयोग सहायक वनरक्षक की भर्ती के रूप में वन विभाग में करना चाहती है जो की बिल्कुल उचित नहीं है
महासंघ माननीय मुख्यमंत्री से आग्रह करता है कि सहायक वनरक्षक की भर्ती के संदर्भ में पुनर्विचार किया जाए व जैसे वन रक्षक की भर्ती पहले से होती आई है उसी प्रक्रिया के तहत वनरक्षक भर्ती किया जाए।

महासंघ माननीय मुख्यमंत्री के ध्यानअर्थ यह मामला भी लाना चाहते हैं की जब एक बीट में वनरक्षक कार्यरत होगा तो क्या उस वनरक्षक के पास एक सहायक वनरक्षक व एक वन मित्र नियुक्त होंगे, जो की संभव नहीं है।
अगर सहायक वनरक्षक को ही बीट की जिम्मेदारी दे दी जाएगी तो यह कैसे निश्चित होगा कि किस बीट पर सहायक वनरक्षक नियुक्त होगा व किस बीट पर वनरक्षक नियुक्त होगा और जब स्थानांतरण का समय आएगा तो सहायक वनरक्षक व वनरक्षक पदों में विरोधाभास खड़ा हो जायेगा व बहुत से कानूनी समस्याएं सामने आएगी।
कानूनी प्रक्रिया में आपकी भर्ती फिर फाइनेंसियल बोझ झेलेगी, क्योंकि आप एक आउटसोर्स भर्ती में सहायक वन रक्षक के नाम पर उसे वन रक्षक के बराबर कार्य और पावर देने से उसका वर्क नेचर और कार्यक्षेत्र एक जैसा काउंट होने पर न्यायालय उन्हें फिर वन रक्षक के बराबर ही वेतन देने का निर्णय देगा। यह पालिसी न्यायालय में टिकने नहीं वाली इसलिए बेहतर है इसपर पुनर्विचार किया जाए।
साथ ही अध्यक्ष वन वृत्त मंडी ने कहा कि वन विभाग में राजस्व ऑफिसर व लॉ ऑफिसर के पद स्वीकृत करने के लिए माननीय मुख्यमंत्री का बहुत बहुत धन्यवाद।
व वन विभाग के समस्त कर्मचारियों अधिकारियों को यह विश्वास दिलाया कि जो प्रयोग वन विभाग में सहायक रक्षक भर्ती के नाम पर किए जा रहे हैं।
इस सन्दर्भ में जल्द ही हम राज्य कार्यकारिणी के नेतृत्व में माननीय मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी आपत्ति दर्ज करवाएंगे।

