विमल नेगी मामले की गूंज में गुम हुई DGP डॉ. अतुल वर्मा की रिटायरमेंट, न भव्य परेड न सम्मान समारोह

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शिमला – नितिश पठानियां 

प्रदेश पुलिस के मुखिया डॉ. अतुल वर्मा शनिवार को सेवानिवृत्त हो गए लेकिन उनकी विदाई बिना किसी आयोजन के चुपचाप कर दी गई।

आमतौर पर डीजीपी के रिटायरमेंट पर पुलिस लाइन भराड़ी में भव्य परेड और सम्मान समारोह होता है। लेकिन डॉ. वर्मा के लिए न तो कोई समारोह हुआ और न ही कोई सम्मानजनक विदाई दी गई।

डॉ. वर्मा की विदाई न केवल औपचारिकता में सिमट गई बल्कि यह भी स्पष्ट संकेत दे गई कि सरकार उनके कार्यकाल से खुश नहीं है।

पिछले साल जब तत्कालीन डीजीपी संजय कुंडू सेवानिवृत्त हुए थे तो उनकी विदाई को एक उत्सव जैसा माहौल दिया गया था। शिमला के भराड़ी स्थित पुलिस मैदान में भव्य परेड हुई थी और पुलिस अधिकारियों ने रस्सियों से जीप खींच कर उन्हें विदाई दी थी। इस बार तस्वीर पूरी तरह अलग रही। न कोई परेड, न कोई भव्य कार्यक्रम और न ही कोई सार्वजनिक सम्मान।

चीफ़ इंजीनयर विमल नेगी मामले से खड़ा हुआ विवाद

डॉ. अतुल वर्मा का कार्यकाल महज 13 महीने का रहा लेकिन इसके दौरान वे एक बड़े विवाद की चपेट में आ गए। चर्चित चीफ इंजीनियर विमल नेगी मौत प्रकरण में जांच को लेकर उठे सवालों के चलते स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी।

मामले की जांच कर रहे एसपी शिमला संजीव गांधी की अगुवाई वाली एसआईटी पर सवाल उठे थे जिस पर खुद डीजीपी डॉ. वर्मा ने हाई कोर्ट में हलफनामा दायर कर गंभीर टिप्पणियां की थीं।

इसके बाद सरकार ने उन्हें अचानक छुट्टी पर भेज दिया था जिससे स्थिति और पेचीदा हो गई। इस पूरे प्रकरण ने सरकार और पुलिस विभाग के भीतर गहरे मतभेद को उजागर कर दिया था।

माना जा रहा है कि इसी विवाद के चलते सरकार ने उनकी विदाई को साधारण बनाए रखा और कोई औपचारिक आयोजन नहीं किया।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने मई 2024 में डॉ. अतुल वर्मा को डीजीपी नियुक्त करते समय दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को नजरअंदाज किया था।

1989 बैच के आईपीएस एसआर ओझा और 1990 बैच के श्याम भगत नेगी, जो केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। दोनों ही वरिष्ठता में डॉ. वर्मा से ऊपर थे।

बावजूद इसके सरकार ने डॉ. वर्मा पर भरोसा जताया और उन्हें प्रदेश की कमान सौंपी थी। यह फैसला भी उस समय काफी चर्चा में रहा था। एसआर ओझा भी आज ही रिटायर हुए।

डॉ. अतुल वर्मा वर्ष 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उनका कुल सेवा काल 33 वर्षों का रहा। उन्होंने एमबीबीएस और एमबीए की पढ़ाई की है। 11 अक्टूबर 1992 को उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश किया था।

अपने करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं जिनमें पुलिस महानिदेशक राज्य गुप्तचर विभाग, पुलिस महानिदेशक भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था), अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (विजिलेंस) और केंद्र सरकार में विशेष सचिव (गृह) जैसे पद शामिल हैं।

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