वन विश्राम गृह हटली रो रहा अपनी बदहाली के आंसू, विश्राम गृह की देखरेख सिर्फ एक कुक के सहारे

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सिहुंता- अनिल सम्बियाल

जिला चंबा के भटियात क्षेत्र का विश्राम गृह हटली अपनी बदहाली के आंसू रोने को मजबूर है। यह विश्राम गृह वन विभाग के आला अधिकारियों द्वारा लंबे समय से नजर अंदाज किया जा रहा है। धन की कमी हो या कुछ और बजह, यह वन विश्राम गृह अपनी हालत ब्यान कर रहा है। सबसे बड़ी बात यह सामने आई कि यह वन विश्राम गृह एक कुक के सहारे चला हुआ है। यहाँ पर चोकीदार व स्विपर की दो पोस्टें पिछले दो बर्षों से रिक्त पड़ी हैं।

यहां तक कि वन रक्षक का पद भी काफी समय से रिक्त पड़ा है। अतिरिक्त कार्यभार देख रहा वन रक्षक भी चार बजे के बाद अपने घर का रुख कर लेता है और सारी समस्याओं से अकेले कुक को ही सामना करना पड़ता है।

हैरान करने वाली बात यह भी सामने आई है कि कांगड़ा –चंबा का प्रवेश द्वार होने कि बजह से यहां विधायक व मंत्रियों का जमबाड़ा लगा रहता है। मगर आज तक वन विश्राम गृह हटली की इस दयनीय स्थिति की ओर किसी का ध्यान नहीं गया।

इस विश्राम गृह में VIP को छोड़ कर मात्र दो ही कमरे हैं। इन दो कमरों में कभी DFO तो कभी अन्य सबंधित स्टाफ द्वारा बुकिंग करके बगैर परमिट के भेज दी जाती है जिसके चलते बुकिंग करने वाले व्यक्तियों को कई बार कुक के कमरे में ही रात गुजारना पड़ती है। विश्राम गृह की कुर्सियां, बैड इत्यादि समान टूटा-फूटा पड़ा है।

उधर तैनात कुक कमल राणा ने विभागीय अधिकारियों पर चौबीस घंटे ड्यूटी लेने और तीन चार महीने तक छुट्टी न मिलने के कारण मानसिक तौर पर परेशान करने के आरोप जड़े हैं। बुद्धिजीवियों नारायण सिंह, कुलदीप सिंह, चमन सिंह,बलबंत, जीवन सिंह, कृष्ण चंद आदि ने विभाग के आलाधिकारियों तथा वन मंत्री राकेश पठानिया से वन विश्राम गृह हटली की दयनीय स्थिति को सुधारने तथा रिक्त पड़े पदों को शीघ्र भरने की मांग उठाई है।

उधर वन मंडल अधिकारी कमल भारती से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वन विश्राम गृह हटली की दयनीय स्थिति को देखते हुए एस्टिमेट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। इससे पहले रेंज अधिकारी से बात करके टूटे-फूटे समान को एक -दो दिन में ठीक कर दिया जाएगा। जल्द ही ठीक ही स्टाफ की नियुक्ति भी कर दी जाएगी।

 

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