राधा अष्टमी के शाही स्नान से पहले बाबा चर्मटनाथ की पवित्र छड़ी चंबा से मणिमहेश कैलाश के लिए रवाना हो गई। श्रद्धालुओं में दिखा आस्था और उत्साह।
चम्बा – भूषण गुरुंग
राधा अष्टमी के शाही स्नान से पहले बाबा चर्मटनाथ की पवित्र छड़ी चंबा से मणिमहेश के लिए रवाना हो गई है। करीब 110 किलोमीटर की पैदल यात्रा तय करते हुए ये पवित्र छड़ी 17 सितंबर की शाम मणिमहेश पहुंचेगी और 18 सितंबर को राधा अष्टमी के पावन अवसर पर शाही स्नान में शामिल होगी।
मान्यता है कि राधा अष्टमी का स्नान मणिमहेश यात्रा के सबसे पवित्र स्नानों में से एक है और इसी आस्था के चलते देशभर से हजारों श्रद्धालु कैलाश की ओर रुख करते हैं।
भोलेनाथ के जयकारों से गूंजता चंबा, हाथों में पवित्र ध्वज और आगे बढ़ती बाबा चर्मटनाथ की पवित्र छड़ी
मणिमहेश कैलाश मानसरोवर की पवित्र यात्रा में आज आस्था का एक और कारवां चंबा से रवाना हुआ। नाथों के नाथ नौ नाथों में एक माने जाने वाले बाबा चर्मटनाथ की पवित्र छड़ी को विधिवत पूजा-अर्चना के बाद मणिमहेश के लिए रवाना किया गया।
दो प्रमुख पवित्र स्नानों में पहला स्नान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर 4 सितंबर को हो चुका है। अब श्रद्धालुओं की नजर 18 सितंबर को होने वाले राधा अष्टमी के शाही पावन स्नान पर है।
राधा अष्टमी के इस पवित्र स्नान में शामिल होने के लिए साधु-संतों की पवित्र छड़ियां चंबा से मणिमहेश की ओर रवाना हो रही हैं। इसी कड़ी में बाबा चर्मटनाथ की ये पवित्र छड़ी भी करीब 110 किलोमीटर का पैदल सफर तय करेगी।
आज चंबा से प्रस्थान करने के बाद बाबा चर्मटनाथ की पवित्र छड़ी शाम को राधा कृष्ण मंदिर जुलाकड़ी में रात्रि विश्राम करेगी। इसके बाद अगले दिन सुबह छड़ी मणिमहेश के लिए रवाना होगी और 17 सितंबर की शाम तक मणिमहेश के पवित्र स्थल पर पहुंचने का कार्यक्रम है।
18 सितंबर को राधा अष्टमी के पावन अवसर पर शाही स्नान के बाद ये पवित्र छड़ी वापस चंबा के लिए प्रस्थान करेगी। छड़ी यात्रा में बाबा चर्मटनाथ के महंत के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु भी शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ के जयकारे लगाए और इस पवित्र छड़ी के माध्यम से महादेव का आशीर्वाद प्राप्त किया।
मणिमहेश की ये यात्रा सिर्फ पहाड़ों को पार करने का सफर नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और भगवान भोलेनाथ के प्रति समर्पण की यात्रा है। राधा अष्टमी के शाही स्नान के साथ ही मणिमहेश कैलाश की पवित्र धरती एक बार फिर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजेगी और बाबा चर्मटनाथ की ये पवित्र छड़ी भी उस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पल की साक्षी बनेगी।

