हिमखबर डेस्क
आपके दिमाग में क्या चल रहा है, इसे समझने और मस्तिष्क की गतिविधियों का सटीक अध्ययन करने के लिए अत्याधुनिक 256 चैनल ईईजी (इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राफी) मशीन अब भारत में भी शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध हो रही है।
इस उन्नत तकनीक का प्रदर्शन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (Indian Institute of Technology) मंडी में किया गया, ताकि संस्थान के प्रशिक्षु और शोधार्थी इसके कार्यप्रणाली को समझ सकें तथा भविष्य में इस क्षेत्र में अनुसंधान को आगे बढ़ा सकें।
विदेश से आयातित यह अत्याधुनिक मशीन मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों का पहले की तुलना में कहीं अधिक विस्तृत और सटीक विश्लेषण करने में सक्षम है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक न्यूरोसाइंस, मस्तिष्क संबंधी रोगों के निदान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
मशीन के प्रदर्शन के लिए आई कंपनी के ईईजी प्रबंधक अश्वनी राव ने बताया कि वर्तमान में अधिकांश अस्पतालों और शोध संस्थानों में 8, 16 या 32 चैनल वाले ईईजी सिस्टम का उपयोग किया जाता है।
इन प्रणालियों से मस्तिष्क के सीमित हिस्सों की गतिविधियों की ही जानकारी मिल पाती है। वहीं 256 चैनल ईईजी सिस्टम में पूरे सिर पर बड़ी संख्या में सेंसर लगाए जाते हैं, जिससे मस्तिष्क के लगभग हर हिस्से की विद्युत गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से शोधकर्ताओं को मस्तिष्कीय तरंगों की सूक्ष्म से सूक्ष्म जानकारी प्राप्त होती है और गतिविधियों की विस्तृत रिपोर्ट तुरंत उपलब्ध हो जाती है। इससे मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्रों के बीच होने वाले संचार और उनकी कार्यप्रणाली का अधिक सटीक विश्लेषण संभव हो पाता है।
अश्वनी राव के अनुसार यह उन्नत ईईजी प्रणाली मिर्गी, ब्रेन ट्यूमर, नींद संबंधी विकारों, विभिन्न न्यूरोलॉजिकल बीमारियों तथा संज्ञानात्मक गतिविधियों पर किए जाने वाले शोध में बेहद उपयोगी साबित हो रही है। इससे वैज्ञानिकों को मस्तिष्क की जटिल संरचना और कार्यप्रणाली को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिल रही है।
उन्होंने बताया कि 256 चैनल ईईजी प्रणाली सलाइन आधारित तकनीक पर कार्य करती है, जिससे परीक्षण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान और प्रभावी हो गई है। यह प्रणाली उच्च गुणवत्ता वाले डेटा संग्रहण के साथ-साथ रियल टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा भी प्रदान करती है। शोध के दौरान प्राप्त आंकड़ों का उपयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग आधारित विश्लेषण में भी किया जा सकता है।
अश्वनी राव ने बताया कि पहले ईईजी परीक्षण के दौरान इलेक्ट्रोड लगाने के लिए मुल्तानी मिट्टी जैसी पारंपरिक सामग्री का उपयोग किया जाता था, लेकिन अब सलाइन आधारित आधुनिक तकनीक ने इस प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और प्रभावी बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ऐसी उन्नत प्रणालियां न्यूरोसाइंस और स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलेंगी।

