शिमला – नितिश पठानियां
संसद में बजट सत्र के तीसरे दिन मंडी संसदीय क्षेत्र से सांसद कंगना रनौत को पहली बार बोलने का मौका मिला। इस मौके पर जहां कंगना ने सबसे पहले लोकसभा अध्यक्ष का मंडी की जनता की ओर से स्वागत किया, वहीं बेबाक तरीके से अपनी बात भी रखी।
अपनी पहली स्पीच में कंगना रनौत ने हिमाचल की कला व संस्कृति को सहेजने की बात करते हुए अपनी ही सरकार से सवाल करते हुए नजर आई। अपनी स्पीच में कंगना ने पहले पहाड़ी प्रदेश हिमाचल में घर बनाने की पांरपरिक शैली काठ -कुनी की बात की।
कंगना ने कहा कि घर बनाने की यह शैली विलुप्त होती जा रही है। इसके बाद कंगना ने हस्थशिल्प कला का जिक्र करते हुए कहा कि हिमाचल के लोगों द्वारा भेड़ और याक की ऊन से किमती वस्त्र पहाड़ी टॉपी, शॉल, जैकेट इत्यादि बनाए जाते हैं। विदेशों में इन वस्त्रों की अत्यधिक डिमांड भी रहती है। लेकिन हिमाचल में अब यह कला भी विलुप्त होती जा रही है।
वहीं, कंगना ने हिमाचल के ऊपरी क्षेत्रों लौहल स्पीति, किन्नौर व भरमौर का जिक्र करते हुए कहा कि धीरे-धीरे यहां की लोक, कला संस्कृति, संगीत व पहनावा भी विलुप्त होता जा रहा है। कंगना ने सवाल करते हुए कहा कि हिमाचल की विलुप्त होती इन कलाओं और संस्कृति को संजोए रखने में सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

