पानी की बर्बादी रोकेगा इंजीनियरिंग प्रशिक्षुओं का यह अविष्‍कार, बर्तन भर जाने के बाद खुद बंद हो जाएगा नल

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नगरोटा बगवां – राजीव जस्वाल

राजकीय राजीव गांधी इंजीनियरिंग कालेज नगरोटा बगवां के दो प्रशिक्षुओं ने नई नल प्रणाली का आविष्कार किया है, जिससे पानी को व्यर्थ बहने से रोका जा सकेगा। यह प्रणाली जल संरक्षण की दिशा में सहायक सिद्ध होगी।

संस्थान के इलेक्ट्रानिक्स एवं कम्युनिकेशन विभाग के अंतिम सत्र के प्रशिक्षुओं अभिनव धीमान व हिमांशु राणा ने मोहाली स्थित वकील श्वेता तलवार के माध्यम से इसका पेटेंट पंजीकृत करवाया है। नई नल प्रणाली की विशेषता यह है कि जितने पानी की आवश्यकता होगी, उस हिसाब से उपकरण के माध्यम से सेट किया जा सकेगा।

नगरोटा बगवां के हटवास निवासी अभिनव धीमान एवं बालूग्लोआ निवासी हिमांशु राणा बताते हैं कि जब भी वह पानी को व्यर्थ होते देखते थे तो मन में पीड़ा होती थी। शोध पानी की बर्बादी की समस्या को हल करने पर केंद्रित है।

दुनिया का 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका हुआ है, इसका केवल ढाई प्रतिशत हिस्सा ही पीने योग्य है। पारंपरिक नलों से अतिप्रवाह के कारण दुनियाभर के उद्योगों और घरों में कई गैलन पानी बर्बाद हो रहा है।

बर्तन भरने पर बंद हो जाएगा नल

नल के नीचे रखे बर्तन के भर जाने के बाद अपने आप ही पानी बंद हो जाएगा। टाइमर को निर्धारित किया जा सकेगा तथा जरूरत के हिसाब से ही नल से पानी का प्रवाह होगा। इस पैटर्न को लेकर दोनों प्रशिक्षु खुद उद्योग लगाने में सक्षम नहीं है इसलिए उद्योगपतियों से बातचीत कर इसे बेचने का मन बनाया है।

इनसे मिला मार्गदर्शन

सहायक प्रोफेसर संजीव कुमार के मार्गदर्शन में शोध किया है। विभाग के प्राध्यापक विवेक मनकोटिया, मनीष भारद्वाज, आशीष शर्मा, अक्षय कंवर व संजीव नरयाल ने भी मुख्य भूमिका निभाई है।

अविष्‍कार समाज हित में

सहयक प्रोफेसर संजीव कुमार ने कहा अभिनव धीमान तथा हिमांशु राणा ने वह कर दिखाया है, जो आज के समय की जरूरत है। आविष्कार समाज हित में साबित होगा।

यह बोले निदेशक

राजकीय इंजीनियरिंग कालेज नगरोटा बगवां के निदेशक प्रो. पीपी शर्मा ने कहा अभिनव धीमान एवं हिमांशु राणा ने महाविद्यालय व माता-पिता का नाम रोशन किया है। कालेज में विद्यार्थियों को दी जाने वाली सुविधाओं में बढ़ोतरी की जाएगी।

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