जल है तो कल है, जल है तो जीवन है

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भलाड – शिबू ठाकुर

युवा सोच पूर्व स्वयंसेवी युवा सेवा एवं खेल विभाग हिमाचल प्रदेश सरकार नितिश कुमार ने विश्व जल दिवस पर अपने विचार रखते हुए कहा कि जल ही जीवन है और वर्तमान समय में जिस प्रकार से लोग उसका दुरुपयोग कर रहे हैं, आने वाले समय में जल को पाना बहुत ही कठिन कार्य हो जाएगा, क्योंकि हमारे पूर्वजों ने जल नदियों में देखा हमारे माता-पिता ने कुएं में देखा हमने नल में देखा और आने वाले हमारे वंशज और वर्तमान में हम भी पानी को बोतलों में बिकते हुए देख रहे हैं तो आइए आज हम संकल्प करें कि जल को बचाना है।

इस नारे के साथ उन्होंने अपने वक्तव्य शुरू करते हुए कहा कि जल एक ऐसा दुर्लभ प्राकृतिक संसाधन है, जो सिर्फ कृषि कार्यों के लिए ही नहीं बल्कि पृथ्वी पर जीवन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन चिंतनीय स्थिति यह है कि जल की कमी का संकट न केवल भारत बल्कि दुनिया के लगभग सभी देशों की एक विकट समस्या बन चुका है। तो लोगों को जल का महत्व बताने और कैसे अलग-अलग तरीकों से उसे संरक्षित किया जा सकता है इसके लिए यह दिन मनाया जाता है।

जानें किस मकसद के साथ और कब से हुई थी इस दिन को मनाने की शुरुआत

यह दिवस मनाए जाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र द्वारा साल 1992 में ब्राजील के रियो द जेनेरियो में आयोजित ‘पर्यावरण तथा विकास का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन’ में की गई थी। पहला विश्व जल दिवस 22 मार्च 1993 को मनाया गया था। जल संरक्षण और रखरखाव को लेकर दुनियाभर के लोगों में जागरुकता फैलाने के लिए हर 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। सही मायने में यह दिन जल के महत्व को जानने, समय रहते जल संरक्षण को लेकर सचेत होने और पानी बचाने का संकल्प लेने का दिन है।

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