करवाचौथ पर सर्वार्थ सिद्धि-शिव योग, पत्नियां रखेंगी व्रत, शाम 5:44 से 7:02 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त

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शाम 5:44 से 7:02 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त, पति की लंबी आयु को पहली नवंबर को पत्नियां रखेंगी व्रत।

ज्योतिष आचार्य अमित कुमार शर्मा 

हिंदू धर्म में करवाचौथ का बड़ा ही महत्त्व है। यह व्रत हर साल कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन रखा जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और शाम के समय पूजा के बाद चंद्रमा को अघ्र्य देकर व्रत का पारण करती हैं।

ज्योतिष क्षेत्र में ख्याति प्राप्त जवाली के ज्योतिषीआचार्य अमित कुमार शर्मा ने बताया कि इस साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 31 अक्तूबर मंगलवार को रात 9:30 बजे से हो रही है।

यह तिथि अगले दिन पहली नवंबर 2023 को रात 9:19 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि और चंद्रोदय के समय को देखते हुए करवाचौथ का व्रत पहली नवंबर 2023 बुधवार को रखा जाएगा। पहली नवंबर को करवाचौथ के दिन सर्वार्थ सिद्धि और शिव योग का संयोग बन रहा है।

इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:33 बजे से दो नवंबर को सुबह 04:36 बजे तक रहेगा। इसके अलावा पहली नवंबर की दोपहर 02:07 बजे से शिवयोग शुरू हो जाएगा।

इन दोनों शुभ संयोग की वजह से इस साल करवाचौथ का महत्त्व और बढ़ गया है। पहली नवंबर को करवाचौथ वाले दिन चंद्रोदय 8:26 बजे पर होगा। वहीं इस दिन शाम 5:44 बजे से 7:02 बजे तक पूजा का शुभ मुहूर्त है।

पूजा विधि

करवाचौथ के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। इसके बाद मंदिर की साफ-सफाई करके दीपक जलाएं। फिर देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करें और निर्जला व्रत का संकल्प लें।

शाम के समय पुन: स्नान के बाद जिस स्थान पर आप करवाचौथ का पूजन करने वाले हैं, वहां गेहूं से फलक बनाएं और उसके बाद चावल पीस कर करवा की तस्वीर बनाएं।

इसके बाद आठ पूरियों की अठवारी बनाकर उसके साथ हलवा या खीर बनाएं और पक्का भोजन तैयार करें। इस पावन दिन शिव परिवार की पूजा अर्चना की जाती है।

ऐसे में पीले रंग की मिट्टी से गौरी कि मूर्ति का निर्माण करें और साथ ही उनकी गोद में गणेश को विराजित कराएं। कथा सुनते समय हाथ पर गेहूं या चावल के 13 दाने लेकर कथा सुनें।

पूजा करने के उपरांत चंद्रमा निकलते ही चंद्र दर्शन के उपरांत पति को छलनी से देखें। इसके बाद पति के हाथों से पानी पीकर अपने व्रत का पारण करें।

व्रत की मान्यता

पौराणिक मान्यता के अनुसार, करवाचौथ का व्रत रखने की परंपरा की शुरुआत महाभारत काल से हुई थी। सबसे पहले श्रीकृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने पांडवों के प्राण की रक्षा के लिए इस व्रत को किया था।

कहा जाता है कि द्रौपदी के व्रत रखने के कारण ही पांडवों के प्राण पर कोई आंच नहीं आई थी। इसलिए कहा जाता है कि हर सुहागिन स्त्री को अपने पति की रक्षा और लंबी आयु के लिए करवाचौथ का व्रत रखना चाहिए।

साथ ही इस व्रत को रखने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है और आपसी संबंध मधुर होते हैं।

 

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