आजादी का अमृत महोत्सव: इस गांव में आज भी मिलता है सोना-चांदी और अशर्फियां, जानें इतिहास

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सोलन- जीवन वर्मा

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के ऊंचा गांव में सड़क और मकानों के लिए की जाने वाली खुदाई में सोना-चांदी और अशर्फियां मिलना आम बात है। कई मर्तबा तो पुरातन काल के हथियार भी यहां मिल चुके हैं। कहा जाता है कि कुनिहार क्षेत्र के इस गांव में रजिया सुल्तान अपने दल बल के साथ रही थीं। ऊंची जगह होने के कारण उन्होंने कुनिहार रियासत की  के गांव को अपने रहने के लिए चुना था।

राणा संजय देव ने बताया कि रजिया सुल्तान के लाव लश्कर के लिए प्राचीन शिव मंदिर तालाब के पास एक पोखर थी, जिसकी खुदाई तत्कालीन कुनिहार रियासत के राजा अच्छर देव सिंह की इजाजत से की गई और इस पोखर को एक बड़े तालाब में तबदील किया गया था। उस समय इस तालाब में नील कमल का बीज रजिया सुल्तान ने डाला था। इसके प्रमाण आज भी तालाब में खिले कमलों से मिलता है। करीब ढाई वर्षों तक रजिया सुल्तान यहां रही थी।

कभी सवें मुल्ख के नाम से मशहूर था कुनिहार

हिमाचल प्रदेश के अस्तित्व में आने से पूर्व कुनिहार एक छोटी सी रियासत थी। सवें मुल्ख के नाम से मशहूर कुनिहार को प्राकृतिक सौंदर्य के कारण छोटी विलायत के नाम से भी जाना जाता है। आठवीं शताब्दी के आस पास अखनूर जम्मू से आये सूर्यवंशी राजपूत अभोज देव द्वारा कुनिहार रियासत की नींव रखी गई थी, जो उस समय कुनुर रियासत के नाम से भी जाती थी। जनश्रुति के अनुसार कुनिहार क्षेत्र के चारों ओर कुनी खड्ड बहती है और कुनी खड्ड कुनिहार रियासत को हार पहनाती नजर आती है, जिसके कारण आज यह क्षेत्र कुनिहार के नाम से प्रख्यात है।

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