मिट्टी में गढ़ रहा सपनों की कहानी, नाहन का प्रियांशु बना जबरदस्त कलाकार, हुनर देख हर कोई हैरान

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नाहन के प्रियांशु ने मिट्टी को अपनी कला का माध्यम बनाकर शानदार कलाकृतियां तैयार की हैं। उनके हुनर और अनोखी कला की हर कोई तारीफ कर रहा है।

सिरमौर – नरेश कुमार राधे

मिट्टी हमारे जीवन और संस्कृति से जुड़ा वह माध्यम है, जिसे सदियों से इनसान अपनी कल्पनाओं का आकार देता आया है। मिट्टी के बरतन हों या कलात्मक मूर्तियां, इनसे जुड़ी कला हमारी समृद्ध परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की पहचान रही है।

बदलते दौर में जब युवा आधुनिक तकनीक और डिजिटल दुनिया की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे समय में मिट्टी की कला के प्रति किसी युवा का आकर्षित होना अपने आप में खास बात है।

रचनात्मकता को मिट्टी में आकार दे रहे प्रियांशु

नाहन के युवा प्रियांशु पुंडीर ऐसे ही एक प्रतिभाशाली युवा हैं, जिन्होंने मिट्टी को अपनी रचनात्मकता का माध्यम बनाया है। क्ले मॉडलिंग यानी मिट्टी से कलाकृतियाँ बनाने के प्रति प्रियांशु की गहरी रुचि है। उनके लिए मिट्टी महज एक साधारण पदार्थ नहीं, बल्कि अपनी कल्पनाओं को साकार करने का माध्यम है।

पढ़ाई के साथ कला के क्षेत्र में भी पहचान

प्रियांशु वर्तमान में डॉ. यशवंत सिंह परमार स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नाहन में अंग्रेजी विषय में मास्टर कर रहे हैं। पढ़ाई के साथ-साथ कला के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने की उनकी कोशिश निश्चित रूप से प्रेरणादायक है।

डिजिटल क्रिएटर भी हैं प्रियांशु

नाहन के बनोग निवासी प्रियांशु डिजिटल क्रिएटर भी हैं। उन्हें रील्स बनाने का शौक है और डिजिटल दुनिया में भी वह सक्रिय हैं। एक तरफ आधुनिक डिजिटल क्रिएशन और दूसरी तरफ मिट्टी जैसी पारम्परिक कला—प्रियांशु की यह रचनात्मक यात्रा उन्हें औरों से अलग बनाती है।

यूथ फेस्टिवल में कॉलेज का प्रतिनिधित्व

इस प्रतिभा को अब एक बड़ा मंच भी मिल रहा है। इस बार कॉलेज के यूथ फेस्टिवल में प्रियांशु क्ले मॉडलिंग के माध्यम से अपने कॉलेज का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। शिमला में आयोजित हो रहे इस आयोजन में अपनी कला का प्रदर्शन करना उनके लिए निश्चित रूप से गर्व और उत्साह का क्षण है।

प्रतिभा को पहचानकर आगे बढ़ने की प्रेरणा

प्रियांशु जैसे युवा यह संदेश देते हैं कि प्रतिभा किसी एक क्षेत्र की मोहताज नहीं होती। जरूरत है तो केवल अपनी रुचि को पहचानने, उसे समय देने और लगातार बेहतर करने की। मिट्टी को आकार देते-देते प्रियांशु अपने सपनों को भी आकार दे रहे हैं।

उनकी यह कला न केवल हमारी पुरानी परम्परा से जुड़ाव की कहानी कहती है, बल्कि यह भी बताती है कि आज का युवा अपनी आधुनिक पहचान के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भी सहेज सकता है।

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