कुल्लू दशहरा में दिखेगा दुनिया की संस्कृति और हिमाचल की लोक कला का संगम, 20 देशों के कलाकार आने की संभावना

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अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में इस बार वैश्विक संस्कृति और हिमाचल की लोक कला का संगम देखने को मिलेगा, कला केंद्र का नवीनीकरण पूरा हो चुका है और 15 से 20 देशों के कलाकारों के शामिल होने की संभावना जताई गई है।

हिमखबर डेस्क

अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव इस बार वैश्विक संस्कृति, लोक परंपराओं और आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के अनूठे संगम का साक्षी बनेगा। 21 से 27 अक्तूबर तक आयोजित होने वाले उत्सव में देश-विदेश के कलाकार अपनी संस्कृति की झलक प्रस्तुत करेंगे। उत्सव समिति के अध्यक्ष एवं विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि इस बार दशहरे को पहले से अधिक आकर्षक, भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

गुरुवार को लाल चंद प्रार्थी कला केंद्र कुल्लू में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि लाल चंद प्रार्थी कला केंद्र का नवीनीकरण निर्धारित समय में पूरा किया गया है। इसके लिए उन्होंने जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग को बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि कला केंद्र के नए स्वरूप में कलाकारों को बेहतर मंच मिलेगा और दर्शक पहले से अधिक आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद ले सकेंगे।

15 से 20 देशों के कलाकारों की भागीदारी संभव

सुंदर सिंह ठाकुर ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक परिषद के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद करीब 15 से 20 देशों के कलाकारों के उत्सव में शामिल होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त देश के विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक केंद्रों से भी कलाकार कुल्लू पहुंचेंगे। इससे दर्शकों को विभिन्न देशों और भारतीय राज्यों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि इस बार उत्सव में एक विशेष सामूहिक नृत्य प्रस्तुति तैयार की जा रही है, जिसमें विदेशी कलाकार भी कुल्लू की लोक धुनों पर थिरकते नजर आएंगे। इस प्रस्तुति में विदेशी, राष्ट्रीय और स्थानीय कलाकारों को एक मंच पर लाकर सांस्कृतिक एकता और विविधता का संदेश दिया जाएगा। इसके लिए नृत्य का विशेष रूप से संयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दशहरे में कई नए आकर्षण देखने को मिलेंगे और स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के पर्याप्त अवसर दिए जाएंगे।

347 देवी-देवताओं को निमंत्रण

विधायक ने कहा कि कुल्लू दशहरा की असली पहचान यहां की समृद्ध देव परंपरा है। उत्सव में भाग लेने के लिए 347 देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा गया है। समिति और जिला प्रशासन का प्रयास रहेगा कि देवताओं के साथ आने वाले देवलुओं, गुरों और पुजारियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं। उन्होंने कहा कि देव समाज की सुविधा, सम्मान और परंपराओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष जोर

सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि उत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस अधीक्षक को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। शहर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जा रहे हैं तथा पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि भूतनाथ पुल से शास्त्री नगर, गांधीनगर और बाबा बालक नाथ मंदिर सहित शहर के प्रमुख क्षेत्रों में रोशनी और सजावट की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही उत्सव स्थल और शहर में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आयोजन को सफल बनाने के लिए केवल साज-सज्जा ही नहीं, बल्कि यातायात प्रबंधन, सुरक्षा, साफ-सफाई और आम लोगों की सुविधा सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता है।

उन्होंने मीडिया से उत्सव की सकारात्मक गतिविधियों, सांस्कृतिक विरासत और व्यवस्थाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का आग्रह किया। साथ ही कहा कि पत्रकारों और स्थानीय लोगों से मिलने वाले सुझावों को भी महत्व दिया जाएगा, ताकि आयोजन को और बेहतर बनाया जा सके।

विधायक ने बताया कि वर्ष 2023 में उनकी अध्यक्षता में आयोजित दशहरा उत्सव के दौरान समिति की आय लगभग 6.5 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर करीब 10 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि आय में वृद्धि के साथ उत्सव की व्यवस्थाओं और सुविधाओं पर होने वाले खर्च में भी बढ़ोतरी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का उपयोग उत्सव को बेहतर बनाने तथा देवी-देवताओं, देवलुओं, गुरों और पुजारियों सहित संबंधित वर्गों को सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए किया जा रहा है। देव समाज की आवश्यकताओं और सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए आयोजन को अधिक व्यवस्थित बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

कला केंद्र में दिखेंगी विविध प्रस्तुतियां

सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि लाल चंद प्रार्थी कला केंद्र इस बार उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगा। यहां स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करने के साथ विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं और प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। वैश्विक सामूहिक नृत्य प्रस्तुति के लिए भी अलग मंच तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने विश्वास जताया कि स्थानीय लोक संस्कृति, देश के विभिन्न राज्यों की परंपराओं और विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियों से अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा नई पहचान स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि कुल्लू दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कला और देव परंपरा का प्रतीक है। सभी के सहयोग से इस वर्ष का उत्सव भव्य, सुव्यवस्थित और यादगार बनेगा।

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