हिमाचल प्रदेश में एक महिला वैज्ञानिक को मातृत्व अवकाश की मांग करने के तीन दिन बाद नौकरी से हटाने का मामला सामने आया है, मामले में हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी पर रोक लगाई है, कोर्ट के आदेश और मामले की विस्तृत जानकारी के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मातृत्व लाभ के लिए आवेदन करने के तीन दिन बाद महिला वैज्ञानिक की सेवाएं समाप्त किए जाने के मामले में हस्तक्षेप किया है। अदालत ने सेवा समाप्ति के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए याचिकाकर्ता डॉ. आईना शर्मा को तुरंत पद पर बहाल करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने केंद्र सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने डॉ. आईना शर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
याचिका में मातृत्व लाभ के लिए आवेदन करने के तुरंत बाद सेवा समाप्त किए जाने को चुनौती दी गई है। याचिका के अनुसार, डॉ. आईना शर्मा को 14 मार्च 2024 को जारी विज्ञापन के तहत केंद्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग की ओर से वित्त पोषित वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी (वीआरडीएल) योजना में साइंटिस्ट-बी (मेडिकल) के पद पर नियुक्त किया गया था।
शुरुआत में उनकी नियुक्ति एक वर्ष के लिए की गई थी। बाद में अनुबंध की अवधि बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दी गई। याचिकाकर्ता ने 4 अगस्त 2026 को विभाग के समक्ष मातृत्व लाभ के लिए आवेदन किया था। इसके तीन दिन बाद विभाग ने आदेश जारी कर उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं।
विभाग की ओर से सेवा समाप्ति के पीछे 16वें वित्त आयोग की अवधि यानी वर्ष 2026-27 से 2030-31 के दौरान संशोधित वीआरडीएल योजना के नए स्टाफिंग पैटर्न को लागू करने का हवाला दिया गया था।
वहीं, याचिकाकर्ता ने अदालत में दलील दी कि विभाग पहले ही उनका अनुबंध 31 मार्च 2027 तक बढ़ा चुका था। इसके अलावा, योजना को पूरी तरह बंद करने के बजाय उसका नाम बदलकर नए सिरे से अनुबंध के आधार पर कर्मचारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता ने बताया अवैध और भेदभावपूर्ण
डॉ. आईना शर्मा की ओर से अदालत में दलील दी गई कि मातृत्व लाभ के लिए आवेदन करने के तुरंत बाद सेवा समाप्त करना अवैध और भेदभावपूर्ण है। याचिका में सेवा समाप्ति के आदेश को चुनौती देते हुए राहत की मांग की गई।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सेवा समाप्ति के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई और याचिकाकर्ता को तत्काल पद पर बहाल करने के निर्देश दिए। अदालत ने केंद्र सरकार समेत अन्य प्रतिवादियों से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। अब मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।

