हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश के पांगी-भरमौर से विधायक और न्यूरोसर्जन डॉ. जनक राज की ओर से लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सुनने और उनकी मेडिकल रिपोर्ट देखने को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की हालिया टिप्पणी के बाद शुरू हुआ यह मामला अब नादौन तक पहुंच गया है, जहां बुधवार को लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परामर्श देने के दौरान पुलिस की मौजूदगी और पूछताछ का मामला सामने आया।
डॉ. जनक राज बुधवार को नादौन में सुबह करीब 11 बजे लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सुनने और उन्हें चिकित्सकीय परामर्श देने के लिए पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि उनके आने की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में लोग अपनी मेडिकल रिपोर्ट और पर्चियां लेकर उनसे मिलने पहुंचे।
इनमें विशेष रूप से दिमाग, रीढ़ और हड्डियों से संबंधित समस्याओं से जूझ रहे मरीज शामिल थे। इसी दौरान पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंची और डॉ. जनक राज से कार्यक्रम तथा लोगों की मेडिकल रिपोर्ट देखने को लेकर सवाल-जवाब किए। उनसे कार्यक्रम की अनुमति के संबंध में भी जानकारी मांगे जाने की बात सामने आई है।
चंबा दौरे पर टिप्पणी ने पकड़ा तूल
इस दौरान डॉ. जनक राज ने स्पष्ट किया कि न तो वह यहां किसी प्रकार की दवाइयां बांट रहे हैं और न ही कोई राजनीतिक कार्यक्रम कर रहे हैं। उनका कहना था कि यह लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जुड़ा मामला है और लोग अपनी रिपोर्ट दिखाने के लिए उनके पास पहुंचे हैं।
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत इसी महीने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के चंबा दौरे के दौरान की गई एक टिप्पणी से हुई थी। मुख्यमंत्री ने पांगी-भरमौर के विधायक डॉ. जनक राज को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वे पर्चियां देखते रहते हैं।
मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद डॉ. जनक राज ने भी सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि सरकार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर कर दे और अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध करवा दे, तो लोगों को उनके पास आने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।
बदली गई जगह
डॉ. जनक राज का कहना था कि यदि स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत होंगी और मरीजों को अपने क्षेत्र में ही बेहतर उपचार उपलब्ध होगा तो उन्हें इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और उन्हें पर्चियां देखने की जरूरत भी नहीं होगी। इसके बाद से ही पर्चियां देखने का मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।
इसी विवाद के बीच बुधवार को डॉ. जनक राज नादौन पहुंचे। उनका कार्यक्रम लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सुनने और उन्हें चिकित्सकीय परामर्श देने का था। पहले इस कार्यक्रम के लिए एक निजी होटल में स्थान तय किया गया था। लोगों को वहां पहुंचकर अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बतानी थीं और अपनी मेडिकल रिपोर्ट दिखानी थी।
बताया जा रहा है कि होटल में कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी मिलने के बाद संबंधित एजेंसियां वहां पहुंचीं और होटल से संबंधित कागजात एवं कार्यक्रम को लेकर जानकारी ली गई। इसके बाद कार्यक्रम का स्थान दूसरी जग बदल दिया गया लेकिन उसे भी प्रशासन के दबाव के चलते बदलना पड़ा।
इससे बड़ी जनसेवा क्या
दोनों जगह कार्यक्रम नहीं हो पाने के बाद लोगों की सुविधा को देखते हुए स्वास्थ्य परामर्श का कार्यक्रम गीता भवन नादौन में आयोजित किया गया। डॉ. जनक राज के अपने आधिकारिक फेसबुक पेज से इस पूरे घटनाक्रम का एक लाइव प्रसारण भी किया गया। इसमें डॉ. जनक राज को पुलिस कर्मियों के साथ बातचीत और सवाल-जवाब करते हुए देखा गया।
डॉ. जनक राज पांगी-भरमौर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में विशेषज्ञ चिकित्सक रहे हैं। डॉ. जनक राज का कहना रहा है कि यदि उनकी शिक्षा और चिकित्सा का अनुभव किसी जरूरतमंद व्यक्ति के काम आ सकता है तो इससे बड़ी जनसेवा उनके लिए कुछ नहीं हो सकती।
राजनीतिक चर्चाएं तेज
कहा जा रहा है कि डॉ. जनक राज को हिमकेयर योजना से संबंधित चल रही जांच के सिलसिले में एक नोटिस जारी किया गया है। इस नोटिस और नादौन में सामने आए घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। डॉ. जनक राज के समर्थकों और उनके करीबियों की ओर से इसे राजनीतिक दबाव या बदले की कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है हालांकि, इस संबंध में सरकार या संबंधित जांच एजेंसी की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

