हिमाचल में मशरूम कंपोस्ट को लेकर किसानों की रुचि बढ़ रही है, शिमला से लेकर कांगड़ा तक नरेंद्र सिंह का तैयार किया मशरूम कंपोस्ट किसानों तक पहुंच रहा है और कृषि क्षेत्र में इसकी चर्चा हो रही है।
हिमखबर डेस्क
पालोग-नम्होल में तैयार मशरूम कंपोस्ट अब बिलासपुर के साथ शिमला, सोलन, मंडी, हमीरपुर, ऊना और कांगड़ा के किसानों तक पहुंच रही है। पालोग-नम्होल क्षेत्र के मशरूम उद्यमी नरेंद्र सिंह हिल एग्रो मशरूम के संस्थापक हैं।
मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में उन्हें 17 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने मशरूम उत्पादन के साथ कंपोस्ट और स्पॉन तैयार करने, किसानों को प्रशिक्षण देने तथा औषधीय मशरूम की खेती को बढ़ावा देने पर भी काम किया है।
नरेंद्र सिंह की इकाई से वर्तमान में 1500 से अधिक किसान नियमित रूप से कंपोस्ट खरीद रहे हैं, जबकि अब तक 1500 से अधिक किसानों और युवाओं को ऑनलाइन व ऑफलाइन प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उनके उद्यम से पालोग-नम्होल क्षेत्र के 7-8 स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिला है।
मशरूम के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए नरेंदर सिंह ने गणोडर्मा, कॉर्डिसेप्स और शिटाके जैसे औषधीय मशरूम पर भी काम शुरू किया है। गणोडर्मा का ट्रायल सफल रहा है, जबकि अन्य औषधीय मशरूम की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर, केवीके बिलासपुर, आईसीएआर-डीएमआर सोलन और उद्यान विभाग के साथ सहयोग की योजना भी प्रोफाइल में दर्ज है।
मशरूम उद्यम को आगे बढ़ाने में उद्यान विभाग की ओर से भी सहायता मिली। उपलब्ध विवरण के अनुसार वर्ष 2016-17 में मशरूम कंपोस्ट यूनिट के लिए आठ लाख रुपए, बीज उत्पादन इकाई के लिए छह लाख रुपए, ट्रैक्टर के लिए 2.50 लाख रुपए तथा उत्पादन इकाई के लिए आठ लाख रुपए का अनुदान मिला।
इस तरह विभाग की विभिन्न मदों से कुल 26.50 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध हुई। इसके अलावा विभाग की ओर से मशरूम उत्पादन से संबंधित योजनाओं, तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण की जानकारी भी उपलब्ध करवाई जाती है।
नरेंद्र सिंह की पहचान अब केवल मशरूम उत्पादक के रूप में नहीं, बल्कि कंपोस्ट उत्पादन, प्रशिक्षण और किसानों को मशरूम कारोबार से जोडऩे वाले उद्यमी के तौर पर बन रही है। उनकी तैयार कंपोस्ट बिलासपुर से बाहर भी किसानों तक पहुंच रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर विकसित यह कारोबार दूसरे जिलों के किसानों के लिए भी उपयोगी बन रहा है।

