हिमाचल प्रदेश के चंबा में ईरानी कोबरा के डसने से दो लोगों की मौत का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इस प्रजाति के सांप के डसने से मौत का यह पहला दर्ज मामला है। उपलब्ध भारतीय एंटी-स्नेक वेनम के इस जहर पर प्रभावी न होने की बात भी सामने आई है।
चम्बा – भूषण गुरुंग
हिमाचल प्रदेश में ईरानी कोबरा के डसने से दो लोगों की मौत के मामले सामने आए हैं। दोनों लोगों पर सुबह के समय सांप ने हमला किया था। डॉक्टर ओमेश भारती ने कहा कि अनजाने में सांप पर पैर पड़ने के बाद उसने काट लिया। शोध के अनुसार, ठंड और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सुबह धूप सेंकने के लिए सांप बाहर निकला था।
इसी दौरान दोनों लोग उसके संपर्क में आए। ईरानी कोबरा आमतौर पर इंसानी बस्तियों से दूर रहता है और सामान्य परिस्थितियों में हमला नहीं करता, लेकिन खतरा महसूस होने या अचानक संपर्क होने पर काट सकता है।
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में ईरानी कोबरा के डसने से दो लोगों की मौत के मामले सामने आए हैं। भारत में इस प्रजाति के सांप के डसने से मौत की यह पहली रिपोर्ट है। एक व्यक्ति की सांप के डसने के आधे घंटे के भीतर मौत हो गई, जबकि दूसरे ने तीन दिन बाद दम तोड़ दिया।
परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय पहले स्थानीय झाड़-फूंक करने वाले के पास ले गए। हालत बिगड़ने पर तीसरे दिन उसे सिविल अस्पताल भरमौर पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत पाया।
दूसरी घटना सात जुलाई 2021 को चुराह घाटी के भंजराड़ू क्षेत्र में हुई। 62 वर्षीय व्यक्ति सुबह करीब नौ बजे काम पर जा रहा था। इस दौरान उसने अनजाने में ईरानी कोबरा पर पैर रख दिया और सांप ने उसके बाएं पैर पर डस लिया।
अस्पताल ले जाते समय वह रास्ते में ही गिर पड़ा। उसे सिविल अस्पताल तीसा पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पैर पर सांप के डसने के निशान मिले।
शोधकर्ताओं ने बताया कि भारत में उपलब्ध एंटी स्नेक वेनम मुख्य रूप से चार प्रमुख प्रजातियों के जहर के खिलाफ तैयार किया जाता है। इनमें चश्माधारी कोबरा, रसेल वाइपर, कॉमन करैत और सॉ-स्केल्ड वाइपर शामिल हैं। कैस्पियन कोबरा का जहर इन प्रजातियों से अलग है।
अध्ययन में उद्धृत शोध के अनुसार, उपलब्ध एंटी स्नेक वेनम इसके जहर को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय नहीं कर पाता। ईरानी कोबरा का जहर हृदय पर गंभीर असर डाल सकता है। इससे रक्तचाप में गिरावट और हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, मौत के मामलों में जहर के प्रभाव की भूमिका को लेकर और अध्ययन की आवश्यकता है।

