हिमाचल में ईरानी कोबरा का कहर! चंबा में डसने से 2 लोगों की मौत, भारत में पहला मामला

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हिमाचल प्रदेश के चंबा में ईरानी कोबरा के डसने से दो लोगों की मौत का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इस प्रजाति के सांप के डसने से मौत का यह पहला दर्ज मामला है। उपलब्ध भारतीय एंटी-स्नेक वेनम के इस जहर पर प्रभावी न होने की बात भी सामने आई है।

चम्बा – भूषण गुरुंग

हिमाचल प्रदेश में ईरानी कोबरा के डसने से दो लोगों की मौत के मामले सामने आए हैं। दोनों लोगों पर सुबह के समय सांप ने हमला किया था। डॉक्टर ओमेश भारती ने कहा कि अनजाने में सांप पर पैर पड़ने के बाद उसने काट लिया। शोध के अनुसार, ठंड और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सुबह धूप सेंकने के लिए सांप बाहर निकला था।

इसी दौरान दोनों लोग उसके संपर्क में आए। ईरानी कोबरा आमतौर पर इंसानी बस्तियों से दूर रहता है और सामान्य परिस्थितियों में हमला नहीं करता, लेकिन खतरा महसूस होने या अचानक संपर्क होने पर काट सकता है।

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में ईरानी कोबरा के डसने से दो लोगों की मौत के मामले सामने आए हैं। भारत में इस प्रजाति के सांप के डसने से मौत की यह पहली रिपोर्ट है। एक व्यक्ति की सांप के डसने के आधे घंटे के भीतर मौत हो गई, जबकि दूसरे ने तीन दिन बाद दम तोड़ दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, छह जुलाई 2020 को भरमौर क्षेत्र के उल्लांसा गांव में 40 वर्षीय व्यक्ति सुबह करीब साढ़े नौ बजे सेब के बगीचे में कीटनाशक का छिड़काव करने गया था। इस दौरान उसका पैर सांप पर पड़ गया और सांप ने उसके पैर पर दो बार डस लिया। कुछ समय बाद उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी।

परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय पहले स्थानीय झाड़-फूंक करने वाले के पास ले गए। हालत बिगड़ने पर तीसरे दिन उसे सिविल अस्पताल भरमौर पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत पाया।

दूसरी घटना सात जुलाई 2021 को चुराह घाटी के भंजराड़ू क्षेत्र में हुई। 62 वर्षीय व्यक्ति सुबह करीब नौ बजे काम पर जा रहा था। इस दौरान उसने अनजाने में ईरानी कोबरा पर पैर रख दिया और सांप ने उसके बाएं पैर पर डस लिया।

अस्पताल ले जाते समय वह रास्ते में ही गिर पड़ा। उसे सिविल अस्पताल तीसा पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पैर पर सांप के डसने के निशान मिले।

शोधकर्ताओं ने बताया कि भारत में उपलब्ध एंटी स्नेक वेनम मुख्य रूप से चार प्रमुख प्रजातियों के जहर के खिलाफ तैयार किया जाता है। इनमें चश्माधारी कोबरा, रसेल वाइपर, कॉमन करैत और सॉ-स्केल्ड वाइपर शामिल हैं। कैस्पियन कोबरा का जहर इन प्रजातियों से अलग है।

अध्ययन में उद्धृत शोध के अनुसार, उपलब्ध एंटी स्नेक वेनम इसके जहर को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय नहीं कर पाता। ईरानी कोबरा का जहर हृदय पर गंभीर असर डाल सकता है। इससे रक्तचाप में गिरावट और हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, मौत के मामलों में जहर के प्रभाव की भूमिका को लेकर और अध्ययन की आवश्यकता है।

रिपोर्ट में इस सांप के डसने से बचने वाले दो लोगों का भी उल्लेख है। दोनों ने स्थानीय जड़ी-बूटी मिरचाड़ी के इस्तेमाल से ठीक होने का दावा किया। शोधकर्ताओं ने इसकी पहचान पेरगुलारिया डेमिया के रूप में की है। पौधे से सांप के जहर का असर कम होने की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके औषधीय प्रभावों पर आगे अध्ययन की जरूरत है।
शोधकर्ताओं ने लोगों को सांप के डसने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान पहुंचने की सलाह दी है। रिपोर्ट के अनुसार ईरानी कोबरा आमतौर पर इंसानों से दूर रहता है, लेकिन खतरा महसूस होने पर हमला कर सकता है। यह ऊंचाई वाले क्षेत्रों और खुले, पथरीले स्थानों में पाया जाता है।स्थानीय लोगों को इस सांप की पहचान और बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक करना जरूरी है। सांप के डसने पर झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय गंवाना जानलेवा हो सकता है।

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