हिमाचल प्रदेश में एक दुखद घटना सामने आई है। KNH से IGMC रैफर की गई गर्भवती महिला की मौत हो गई, जबकि उसके गर्भ में 7 माह के शिशु की पहले ही मौत हो चुकी थी।
हिमखबर डेस्क
गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रैशर कितना जानलेवा साबित हो सकता है, इसका एक बेहद दुखद मामला शिमला में सामने आया है। कोटखाई की रहने वाली 7 माह की एक गर्भवती महिला की गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के चलते शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में मौत हो गई। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद न तो मां को बचाया जा सका और न ही गर्भ में पल रहे बच्चे को।
आपात स्थिति में केएनएच से किया गया था रैफर
जानकारी के अनुसार रविवार को महिला की तबीयत अचानक बहुत ज्यादा बिगड़ गई थी, जिसके बाद परिजन उसे तुरंत शिमला के कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) लेकर पहुंचे।
अस्पताल में प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को भांप लिया और बिना समय गंवाए उसे बेहतर और आपातकालीन इलाज के लिए आईजीएमसी रैफर कर दिया।
आईजीएमसी पहुंचते ही महिला को सीधे आईसीयू में भर्ती किया गया। जब वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम ने गहन जांच की तो पता चला कि गर्भ में पल रहे सात माह के बच्चे की पहले ही मौत हो चुकी थी।
इसके अलावा, भ्रूण की मौत के कारण महिला के शरीर के अंदर भारी आंतरिक रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) शुरू हो गया था, जिससे उसकी जान पर बन आई थी।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि महिला गंभीर रूप से उच्च रक्तचाप और अन्य मेडिकल जटिलताओं का शिकार हो गई थी। शरीर में अत्यधिक ब्लीडिंग को रोकने और महिला की जान बचाने के लिए आईजीएमसी के डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी की योजना बनाई।
चिकित्सकों की टीम ने महिला को बचाने के लिए हर संभव चिकित्सकीय प्रयास किए, लेकिन शरीर में फैले संक्रमण और रक्तस्राव के कारण रविवार शाम को महिला ने दम तोड़ दिया।
क्या कहता है अस्पताल प्रशासन?
आईजीएमसी प्रशासन ने इस दुखद घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच में मौत का मुख्य कारण उच्च रक्तचाप और उसके कारण उत्पन्न हुई गंभीर जटिलताएं सामने आई हैं।
केएनएच से रैफर होकर आई इस मरीज को बचाने का पूरा प्रयास किया गया। हालांकि, मौत के सटीक कारणों का स्पष्ट पता लगाने के लिए मेडिकल टीम द्वारा विस्तृत जांच की जा रही है। वहीं इस घटना ने मृतका के परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।



