
शाहपुर – नितिश पठानियां
रोजगार संघर्ष यात्रा से ठीक एक दिन पहले शाहपुर कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी इस बार सड़कों पर आ गई है।बड़ी बात यह है कि यात्रा को लेकर जगह-जगह लगाएं जा रहे होर्डिंग्स व बैनरों से प्रदेश कांग्रेस महासचिव केवल सिंह पठानिया गायब है।
इन होर्डिंग्स व बैनरों में ऐसे नेताओं की फ़ोटो चिपकाई गई है, जो केवल पठानिया विरोधी माने जाते है। केवल सिंह पठानियां ने हालांकि पिछले दिनों रोजगार संघर्ष यात्रा के लिए शाहपुर के अभिनंदन मैरिज पैलेस का दौरा कर जनसभा को लेकर पूरी रूप रेखा तेयार की थी।
लेकिन अब जगह-जगह लग रहे होर्डिंग्स व बैनरों में केवल पठानिया की फ़ोटो न होने से ब्लॉक कांग्रेस भी काफी नाराज दिख रही है तथा इस नाराजगी का ही नतीजा है कि अब शाहपुर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने रोजगार संघर्ष यात्रा का शाहपुर की बजाए रैत में स्वागत करने का निर्णय लिया है।
इस बारे ब्लॉक कांग्रेस द्वारा मीडिया सहित तमाम कार्यकर्ताओं को मैसेज भी कर दिए है। ब्लॉक कांग्रेस द्वारा लिए गए निर्णय के बाद शाहपुर में रोजगार संघर्ष यात्रा के एक नही दो कार्यक्रम होंगे।
यहां बता दे कि कांग्रेस ने चुनाव से पहले पूरे प्रदेश में छह बचनों के साथ रोजगार संघर्ष यात्रा निकालने का निर्णय लिया है। पार्टी हाईकमान ने इस संघर्ष यात्रा का नेतृत्व दो युवा नेताओं विक्रमादित्य सिंह व रघुवीर सिंह बाली को दिया है।
बाली को कांगड़ा-चंबा व हमरीपुर तथा विक्रमादित्य सिंह को मंडी और शिमला संसदीय क्षेत्रों का ज़िम्मा दिया है। कांगड़ा में स्वर्गीय जीएस बाली के जन्मदिन पर इस यात्रा का आगाज़ कर दिया है, लेकिन अभी तक यह यात्रा केवल नगरोटा तक ही सीमित थी।
बाली अब इस यात्रा का आगाज़ 20 अगस्त से कर रहे है। यह यात्रा चामुंडा मंदिर से सुबह साढ़े 11 बजे शुरू होगी और धर्मशाला, गगल होते हुए कोटला तक जाएगी।
यात्रा को लेकर बाली समर्थक काफी उत्साहित है तथा यही बजह है कि यात्रा को लेकर जगह-जगह लग रहे होर्डिंग व बेनर में बाली समर्थकों के नाम व फ़ोटो तो है, पर केवल सिंह पठानिया पूरी तरह से गायब है।
केवल सिंह पठानियां के साथ गद्दी नेता हंसराज ठाकुर व कांग्रेस के प्रदेश सचिव जितेंद्र गुलेरिया भी बैनर्स व होर्डिंग्स से गायब है। हैरानी की बात यह है कि भाजपा ने मिशन रिपीट के लिए पूरा जोर लगा दिया है।
पर दूसरी तरफ कांग्रेस के नेता लगातार भाजपा में शामिल हो रहे है, लेकिन बाबजूद इसके कांग्रेसी नेता कोई सबक लेने की बजाए अपनी जय जय कार करने के लिए गुटबाजी को हवा दे रहे है।
