महिला शौचालय के टूटे दरवाजे से नहीं पुरुषों की निक्कर से आपत्ति है टांडा के चिकित्सा अधीक्षक को

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चिकित्सा अधीक्षक की अपरिपक्व कार्यशैली से परेशान टांडा मेडिकल कॉलेज, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने तीमारदार के निक्कर पहनने पर जताई आपत्ति, बोले कॉलेज के महिला स्टाफ करती हैं शिकायत, तीमारदार ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक पर चरित्र हनन का नोटिस भिजवाने की कही बात, तीमारदारों के पर्स बैग भी नहीं सुरक्षित, रोजाना गहने, फोन और पैसे चोरी होना आम बात, वार्ड की तीन टॉयलेट के तो दरवाजे टूटे, तीसरी टॉयलेट की शीट खराब एक साल से टूटा है गेट नंबर 2, अब तक नहीं हुई मुरम्मत, 4 में से दो लिफ्टें खराब।

कांगड़ा – राजीव जसबाल

डॉ राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा (कांगड़ा) में मरीजों और तीमारदारों को सुविधाजनक बनाने के लिए ही शायद मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का पद सृजन किया जाता है।

मेडिकल कॉलेज में सारी व्यवस्थाओं को शुगम और सुचारू बनाए रखना मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का मुखिया जिम्मा होता है।

लेकिन क्या हो अगर कि मुख्य चिकित्सा अधीक्षक व्यवस्थाओं में सुधार करने के बजाए मरीजों और तीमारदारों की पहनावे पर टिप्पणी और आपत्ति करे?

ऐसा ही मामला आज टांडा मेडिकल कॉलेज में देखने को मिला। दरअसल टांडा मेडिकल कॉलेज के आंख, नाक, कान, गला विभाग के महिला वार्ड में उपचाराधीन मरीज के तीमारदार दवाई लेकर मेडिकल स्टोर से वापस आ रहे थे तो सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें गेट नंबर 1 से जाने से यह कह कर रोका क्योंकि वह गेट स्टाफ के लिए ही है।

तीमारदारों ने सिक्योरिटी गार्ड से उसी के साथ लगते गेट नंबर 2 को खुलवाने की बात की तो तीमारदारों और सिक्योरिटी गार्ड के बीच में गहमागहमी हो गई जिसे लेकर मामला मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ मोहन सिंह तक पहुंच गया।

डॉ मोहन सिंह ने उस समस्या को सुलझाने के बजाय तीमारदारों के पहनावे पर आपत्ति जता दी। क्यूंकि मरीज के तीमारदार ने उस वक्त टी-शर्ट और निक्कर पहने हुए थे।

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि मरीज के साथ आते वक्त तीमारदारों को प्रॉपर ड्रेस कोड में होना चाहिए। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि निक्कर पहनने से टांडा मेडिकल कॉलेज की स्टाफ की महिलाएं हम से आए दिन शिकायत करती है।

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की इस टिप्पणी के बाद मामला और बिगड़ गया। तीमारदार ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक पर चरित्र हनन का नोटिस भिजवाने की बात कह डाली और साथ ही मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से कहा कि स्टाफ की उन महिलाओं को बुलाएं जिन्हें ऐसे पहनावे पर आपत्ति है।

इसपर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने आनन-फानन में मेट्रन को बुलाया । तीमारदार द्वारा मेट्रन से ये पूछे जाने पर ही इस पहनावे में क्या खोट है तो मेट्रन ने कहा कि हमें इस पहनावे से कोई आपत्ति नहीं इतना सुनते ही मुख्य चिकित्सा अधीक्षक वहां से खिसक लिया।

इसके बाद तीमारदारों ने गेट नंबर 2 को दुरुस्त करवाने की बात कही, साथ ही आंख नाक कान गला विभाग के महिला वार्ड के शौचालय की टूटे होने की बात कही तो मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने लोक निर्माण विभाग को डेढ़ करोड़ रूपया ट्रांसफर किये जाने का हवाला दे कर पल्ला झाड़ लिया।

टांडा मेडिकल कॉलेज में कैसी है अव्यवस्था

दरअसल टांडा मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्था का यह आलम है कि अधिकतर शौचालय के दरवाजे और सीटें टूटी पड़ी है। लगभग हर विभाग में महिला और पुरुष शौचालय खंडित पड़े हैं। जिस कारण महिला पुरुष एक ही शौचालय का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के ऑफिस के साथ लगता गेट नंबर 2 पिछले 1 साल से टूटा पड़ा है जिसकी अब तक सुध नहीं ली गई। हर विभाग में रोजाना चोरियां हो रही है जिसे लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन निंद्रा में है। टांडा मेडिकल कॉलेज के पुराने भवन में 4 लिफ्टें हैं जिसमें दो कई महीनों से खराब पड़ी है।

इन सब समस्याओं की चिंता मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को नहीं है लेकिन इन सब अव्यवस्थाओं के बावजूद मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को तीमारदार के पहनावे से आपत्ति है।

यूं कहें कि मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की अपरिपक्व कार्यशैली का दंश झेल कर टांडा मेडिकल कॉलेज अपने हालात पर रो रहा है।

अधिकारियों के हालात

इस सन्दर्भ में स्वास्थ्य मंत्री डॉ राजीव सैजल और स्वास्थ्य सचिव शुभाशीष पांडा पर संपर्क साधने की कोशिश की तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

बेशक अपने कार्यक्रम की व्यस्थता के चलने वे फोन उठा पाने में असमर्थ होंगे लेकिन स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुविधाओं की डींगी हांकने वाली सरकार की पोल टांडा मेडिकल कॉलेज रोज खोलता है।

जिससे अधिकारी, कर्मचारी, मरीज और तीमारदार सब भलीभांति वाकिफ हैं।

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