
पराशर ने बणी पंचायत में करवाया महायज्ञ का आयोजन
परागपुर- शिव गुलेरिया
कैप्टन संजय ने कहा है कि जसवां-परागपुर क्षेत्र के गांवों में मूलभूत सुविधाएं जुटाने के लिए अभी धरातल पर बहुत काम करने की जरूरत है।शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य के लिए क्षेत्र आजादी के साढ़े सात दशक बाद भी आत्मनिर्भर नहीं हो पाया है।
रविवार को बणी पंचायत में आयोजित महायज्ञ में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए पराशर ने कहा कि गांवों का विकास कैसे होगा, गांवों की आवश्यकताएं क्या है, बेरोजगार युवाओं रोजगार के अवसर कैसे उपलब्ध करवाए जाएं, शिक्षा और स्वास्थ्य के ढांचे को कैसे मजबूत किया जाए।
इस पर कोई चर्चा करने के लिए तैयार नही है। इसके विपरित जो सुविधाएं गांववासियाें को मिलनी चाहिए, उनका भी ग्रामीण क्षेत्राें में अकाल है।
कहा कि अगर क्षेत्र की सबसे बड़ी पंचायत बणी में सरकारी स्कूल मिडल तक ही है और इस पंचायत में किसी बैंक की कोई शाखा तक नहीं खुली है तो समझा जा सकता है कि विकास के सारे दावे खोखले हैं।
इसी पंचायत में लोगों के घरों के ऊपर से बिजली की तारें गुजर रही हैं, जिन्हें हटाने के लिए ग्रामीणों के पास सिवाय इंतजार के कोई विकल्प नहीं है। पराशर ने कहा कि जनसंवाद कार्यक्रमों में उन्हें कई गांवों के वासियों ने पेयजल की घाेर किल्लत बताई।
हालांकि उन्होंने अपने स्तर पर ग्रामीणों को राहत पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं बन पा रही है, जिससे कि इस समस्या का समाधान हो जाए। आवास योजना के तहत ग्रामीणों को मकान के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।
अस्पतालों का हाल ऐसा है कि बच्चा पैदा करने के लिए भी बाहर के स्वास्थ्य संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। स्वास्थ्य उपकेंद्रों के हाल भी ऐसे हैं कि इनका खुलने और बंद होने की जानकारी गांववासियों को नहीं होती है। स्कूलों व कॉलेजों में पद काफी समय से रिक्त चल रहे हैं।
इस अव्यवस्था से बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ होता साफ नजर आ रहा है। संजय ने कहा कि बेसहारा पशुओं की समस्या ऐसी है कि किसानों का खेती से मोह भंग हो चुका है।
क्षेत्र के ही टिप्परी गांव में गौ अभ्यारण्य बनाया जा सकता है और हजारों बेसहारा गौ धन को आसरा दिया जा सकता है, लेकिन शायद तंत्र इस समस्या के समाधान के लिए भी गंभीर नहीं है।
पराशर ने कहा कि यह भी एक कारण है कि इस क्षेत्र के गांवों से पलायन भी हुआ है। इन समस्याओं के समाधान और गांवों में विकास का खाका सिर्फ व्यवस्था परिवर्तन से ही किया जा सकता है।
संजय ने कहा कि महायज्ञ के आयोजन के पीछे उनकी सोच है कि गांव विकास के पथ पर अग्रसर हों और गांववासी स्मृद्ध व स्वस्थ रहें। बणी के महायज्ञ में चार सौ परिवारों के सदस्यों ने भाग लिया और स्थानीय शिव मंदिर के पवित्र हवनकुंड में आहुतियां डालीं।
इस अवसर पर राजेन्द्र सिंह, संजीव कुमार, बहादुर सिंह, अशोक कुमार, सुभाष चंद, मंजीत सिंह, हरबंस लाल, मनोज कुमारी और वार्ड पंच अनीता कुमारी, निशा और मंजू वाला भी मौजूद रहे। वहीं, संजय पराशर द्वारा बणी में जागरण का आयोजन भी किया गया।
