छात्रों को दी जाने वाली एल्बेंडाजोल टेबलेट में फंगस , विभाग में हड़कंप , डीसी ने दिए जाँच के आदेश

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सिरमौर- नरेश कुमार राधे

एक तरफ तो हिमाचल प्रदेश सरकार लोगों को घर द्वार पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने की बात करती है , दूसरी और हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई दवाओं की खरीद की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लग गया है।

विभाग द्वारा इन दिनों हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में कीड़ों को मारने की दवा एल्बेंडाजोल का वितरण किया जा रहा है , लेकिन जिला सिरमौर के वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला विक्रम बाग में स्वास्थ्य विभाग द्वारा वितरित की गई एल्बेंडाजोल में फंगस पाया गया है जिससे स्वास्थ्य विभाग समेत प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

जानकारी के मुताबिक हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य विभाग द्वारा एल्बेंडाजोल इंदौर की फार्मा कंपनी लैबोरेट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से खरीद की गई है।

वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला विक्रम बाग में वितरित की गई लैबोरेट फार्मा के एल्बेंडाजोल टेबलेट की निर्माण तिथि अक्टूबर 2020 है जबकि एक्सपायरी डेट सितंबर 2022 है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जो टेबलेट एल्बेंडाजोल की वितरित की गई है उससे जहां विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है , वहीं विभाग द्वारा की गई दवाओं की खरीद फरोख्त पर भी सवालिया निशान लग गए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त सिरमौर राम कुमार गौतम ने स्वास्थ्य विभाग को कड़े निर्देश दिए हैं कि स्कूलों में छात्रों को दी जाने वाली एल्बेंडाजोल टेबलेट की पूरी जांच की जाए उसके बाद ही टेबलेट का वितरण किया जाए।

रामकुमार गौतम ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि एल्बेंडाजोल दवा का पूरा बेच वापस मंगाया जाए ताकि किसी भी प्रकार की कोई अनहोनी ना हो।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को पहले भी निर्देश जारी किए जा चुके हैं कि एल्बेंडाजोल की जांच के बाद ही सप्लाई होगी। यह भी तय करने को कहा गया है कि एक्सपायरी डेट की दवाओं का वितरण न किया जाए।

बावजूद इसके भी स्कूलों में फंगस लगी टेबलेट का वितरण किया गया यह जांच का विषय है। उन्होंने कहा कि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग से जवाब तलब किया गया है।

साथ ही डिस्ट्रिक्ट सर्विलांस ऑफिसर को भी जांच के निर्देश दिए गए हैं। इस बारे में जब यंगवार्ता न्यूज़ ने कार्यकारी सीएमओ डा. निसार अहमद से बात की गई तो उन्होंने कहा कि फिलहाल विभाग द्वारा किसी भी प्रकार की कोई जांच कमेटी का गठन नहीं किया गया है।

डॉ. अहमद ने कहा कि पता किया जा रहा है कि यह कैसे हुआ और कहां से चूक हुई है। उन्होंने बताया कि अधिकतर टेबलेट का वितरण किया जा चुका है और स्कूलों से अथवा स्वास्थ्य केंद्रों से एल्बेंडाजोल को वापस लेने की अभी तक कोई भी योजना नहीं है।

गौर हो की हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के सभी स्कूलों में छात्रों को कीड़े को मारने की दवा एल्बेंडाजोल टेबलेट का वितरण किया जा रहा है ताकि बच्चों में एनीमिया और अन्य कोई बीमारी ना हो।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा मध्य प्रदेश के इंदौर से खरीदी गई अल्बेंडाजोल टैबलेट सवालों के घेरे में हैं , क्योंकि यह एक गंभीर विषय है यदि दवा छात्रों को खिलाई जाती तो अन्य कई विकार हो सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फंगस युक्त दवा न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है , बल्कि कई मर्तबा जानलेवा साबित भी हो सकती है।

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